Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
38 साल की उम्र में करियर बदलना आसान नहीं होता। जब परिवार की जिम्मेदारियां हों, 10 साल की बेटी हो और बचत सिर्फ छह महीने तक का खर्च उठाने लायक हो, तब नौकरी छोड़ने का फैसला किसी बड़े जोखिम से कम नहीं होता। लेकिन धर्मेंद्र पांडेय ने यही जोखिम उठाया और आज उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।
18 साल तक किया ईमानदारी से काम
धर्मेंद्र बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2008 में अपने कॉर्पोरेट करियर की शुरुआत की थी। लगभग 18 वर्षों तक उन्होंने अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया।वे देर रात तक ऑफिस में रुकते, नए कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते और हर जिम्मेदारी पूरी लगन से निभाते रहे। लेकिन जब प्रमोशन और पहचान की बारी आई तो उन्हें महसूस हुआ कि मेहनत से ज्यादा ऑफिस पॉलिटिक्स और चापलूसी को महत्व दिया जा रहा है।
‘मेहनत हम करें, प्रमोशन चापलूसों का‘
धर्मेंद्र का कहना है कि लगातार मेहनत के बावजूद उन्हें वह सम्मान और अवसर नहीं मिले जिसके वे हकदार थे।उनके मुताबिक, कई बार ऐसे लोगों को आगे बढ़ा दिया गया जो काम से ज्यादा ऑफिस की राजनीति में माहिर थे। यही अनुभव उनके लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना।
परिवार ने दिया पूरा साथ
नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था, क्योंकि पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ छह महीने का आर्थिक बैकअप है, लेकिन इसके बावजूद परिवार ने उनके फैसले का पूरा समर्थन किया और उनका हौसला बढ़ाया।
38 की उम्र में नई शुरुआत
धर्मेंद्र का मानना है कि अगर व्यक्ति को अपनी स्किल और मेहनत पर भरोसा हो तो नई शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है।उन्होंने कहा कि नौकरी छोड़ने के बाद भी उन्होंने सीखना बंद नहीं किया। नई तकनीकें, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएशन को उन्होंने अपने नए करियर का आधार बनाया।
इंस्टाग्राम बना नया सहारा
धर्मेंद्र ने बताया कि नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, पर लगातार काम करना शुरू किया था।अच्छे फॉलोअर्स बनने के बाद उन्हें विश्वास मिला कि वे अपनी स्किल के दम पर ऑनलाइन भी कमाई कर सकते हैं। अब वे कंटेंट क्रिएशन और अपनी विशेषज्ञता के जरिए नया करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है कहानी?
धर्मेंद्र की कहानी इसलिए लोगों का दिल जीत रही है क्योंकि यह उन लाखों कर्मचारियों की भावनाओं को सामने लाती है, जो कभी न कभी ऑफिस पॉलिटिक्स, प्रमोशन में भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करते हैं।उनकी यह यात्रा सिर्फ नौकरी छोड़ने की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नई शुरुआत और खुद पर भरोसा रखने की कहानी बन गई है।
