Anmol Sandesh News Desk, ब्रिटेन
ब्रिटेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व को देखते हुए अपने इतिहास में पहली बार AI मंत्री की नियुक्ति की है। इस अहम जिम्मेदारी के लिए भारतीय मूल के सांसद कनिष्क नारायण को चुना गया है। उनकी नियुक्ति न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि भारत, खासकर बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए गर्व का विषय बन गई है।

बिहार से ब्रिटेन तक का सफर
कनिष्क नारायण का पैतृक संबंध बिहार के मुजफ्फरपुर से है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई यहीं की और तीसरी कक्षा तक स्थानीय स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। 12 साल की उम्र में वे अपने माता-पिता के साथ ब्रिटेन चले गए, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उन्होंने दुनिया के दो प्रतिष्ठित संस्थानों—
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University)
- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University, USA)
से उच्च शिक्षा हासिल की।
सिर्फ 2 साल में मंत्री बनने का सफर
कनिष्क नारायण ने 2024 के ब्रिटिश आम चुनाव में लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वेल ऑफ ग्लैमॉर्गन (वेल्स) सीट से जीत दर्ज की थी। राजनीति में प्रवेश के महज दो साल के भीतर उन्हें ब्रिटेन का पहला AI एवं ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। यह जिम्मेदारी उन्हें प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व वाली सरकार में मिली है।
परिवार का भी है खास योगदान
कनिष्क के पिता संतोष कुमार और माता चेतना सिन्हा वेल्स की राजधानी कार्डिफ में प्रतिष्ठित सॉलिसिटर हैं। उनके बड़े भाई गौतम नारायण लंदन में डॉक्टर हैं।वहीं, मुजफ्फरपुर के एसकेजे लॉ कॉलेज के निदेशक जयंत कुमार उनके चाचा हैं। इस उपलब्धि की खबर मिलते ही मुजफ्फरपुर में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने इसे बिहार के लिए गर्व का क्षण बताया।
25 साल बाद लौटे थे पैतृक घर
जानकारी के अनुसार, कनिष्क नारायण फरवरी 2026 में करीब 25 साल बाद अपने पैतृक घर मुजफ्फरपुर आए थे। उस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की थी। अब उनके ब्रिटेन के पहले AI मंत्री बनने पर पूरे जिले में खुशी और जश्न का माहौल है।
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और तकनीक का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में ब्रिटेन द्वारा अलग AI मंत्रालय बनाना और उसकी जिम्मेदारी भारतीय मूल के नेता को सौंपना इस क्षेत्र में बढ़ती प्राथमिकता और भरोसे को दर्शाता है।कनिष्क नारायण की यह उपलब्धि भारतीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान का एक और बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
