Anmol Sandesh News Desk, रायपुर
देश की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह ‘एट होम’ में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं जनजातीय संस्कृति की खास झलक देखने को मिलेगी।इस राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के साथ गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत भी प्रस्तुत की जाएगी। करीब 35 कलाकार चारों राज्यों की लोक परंपराओं, नृत्य, संगीत, वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प और वस्त्र कला के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखेंगे।
गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य होंगे खास आकर्षण
छत्तीसगढ़ की ओर से गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य समारोह के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।हरेली पर्व से जुड़ा गेंड़ी नृत्य बांस से बनी ऊंची गेंड़ियों पर कलाकारों के संतुलन, फुर्ती और अद्भुत कौशल को प्रदर्शित करता है।वहीं बस्तर के मड़िया समुदाय का गौर मड़िया नृत्य पारंपरिक वेशभूषा और आकर्षक शिरोभूषण के साथ जनजातीय जीवन, वीरता और प्रकृति के साथ समुदाय के गहरे रिश्ते को दर्शाएगा।
बस्तर की मंगल धुन से शुरू होगा सांस्कृतिक सफर
कार्यक्रम की संगीत प्रस्तुति की शुरुआत छत्तीसगढ़ और बस्तर की पारंपरिक अनुष्ठानिक मंगल धुन से होगी।इसके बाद महाराष्ट्र, गोवा और मध्य प्रदेश की लोक संगीत परंपराओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में चारों राज्यों के कलाकार संयुक्त प्रस्तुति देंगे।इस विशेष संगीत प्रस्तुति का संयोजन छत्तीसगढ़ के लोक गायक, संगीतकार, लेखक और रंगकर्मी राकेश कुमार तिवारी कर रहे हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए जाना जाता है।
बालोद और नारायणपुर के कलाकार भी दिखाएंगे हुनर
इस ऐतिहासिक मंच पर छत्तीसगढ़ के बालोद और नारायणपुर के कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।बालोद के कलाकार मोहरी, दफड़ा, दमाऊ, गुड़ुम और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति देंगे।वहीं नारायणपुर के कलाकार गुटा परई, नार परई, ढोल और कुंदिर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के जरिए बस्तर की अनूठी संगीत विरासत को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएंगे।
ढोकरा कला और बस्तर का लौह शिल्प भी होगा प्रदर्शित
राष्ट्रपति भवन में होने वाली यह प्रस्तुति सिर्फ नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं होगी।छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध ढोकरा कला और बस्तर के पारंपरिक लौह शिल्प को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके जरिए प्रदेश की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा और स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
पनिका बुनाई से लेकर महेश्वरी तक दिखेगी विविधता
चारों राज्यों की पारंपरिक वस्त्र कलाओं को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
इसमें—
- छत्तीसगढ़ की पनिका बुनाई
- महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी
- गोवा की कुंभी साड़ी
- मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई
को प्रदर्शित किया जाएगा।यानी राष्ट्रपति भवन में एक ही मंच पर देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक कला, संगीत, नृत्य और वस्त्र परंपराओं का संगम देखने को मिलेगा।
संस्कृति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
इस साल की सांस्कृतिक प्रस्तुति का एक महत्वपूर्ण संदेश संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध पर केंद्रित है।छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की पारंपरिक जीवनशैली, स्थानीय शिल्प और पवित्र उपवनों के संरक्षण जैसी परंपराएं बताती हैं कि यहां समुदाय और प्रकृति का रिश्ता कितना गहरा रहा है।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की खास पहचान
15 अगस्त का यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए अपनी लोक और जनजातीय सांस्कृतिक पहचान को देश के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक पर प्रस्तुत करने का खास अवसर होगा।गेंड़ी की ऊंचाई, गौर मड़िया की थिरकन, बस्तर की मंगल धुन, पारंपरिक वाद्ययंत्र, ढोकरा कला और पनिका बुनाई—राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का यह रंग देश को अपनी जड़ों से जोड़ने वाला होगा।
