Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
देश में अवैध घुसपैठ और गैरकानूनी प्रवास को लेकर केंद्र सरकार का रुख एक बार फिर सख्त नजर आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने जोर दिया कि भारत में किसी भी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के प्रवेश करके रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘भारत कोई धर्मशाला नहीं’
अमित शाह ने अवैध प्रवासियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत ऐसा देश नहीं है जहां कोई भी व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रिया के आकर बस जाए। उनके मुताबिक, देश में रहने का अधिकार कानून और नागरिकता के नियमों के तहत तय होता है। अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान करना और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाना जरूरी है।यही वजह है कि घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा मजबूत करने को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को विशेष रणनीति के साथ काम करने पर जोर दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों को जीरो टॉलरेंस का संदेश
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में गृह मंत्री ने आतंकवाद, कट्टरपंथ, अवैध घुसपैठ, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों समेत कई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने एजेंसियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ काम करने का संदेश दिया। साथ ही सीमाओं पर निगरानी को और मजबूत करने तथा अवैध प्रवेश रोकने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।
AI और आधुनिक तकनीक पर भी जोर
बदलते सुरक्षा खतरों के बीच अमित शाह ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने को कहा। तकनीक की मदद से बड़ी मात्रा में उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का तेजी से विश्लेषण किया जा सकता है। इससे संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान पहले करने और समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
केंद्र और राज्यों की एजेंसियों में बेहतर तालमेल
गृह मंत्री ने आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अलग-अलग एजेंसियां अकेले नहीं, बल्कि साझा रणनीति और सूचनाओं के आधार पर काम करें।
अवैध प्रवासियों की पहचान और कार्रवाई पर चर्चा
सम्मेलन में अवैध प्रवासियों की पहचान और कानून के तहत उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। सीमा से होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार का रुख है कि अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि वैध नागरिकों और कानूनी प्रक्रिया से भारत में रहने वाले लोगों के अधिकार अलग हैं।
घुसपैठ का मुद्दा क्यों है इतना बड़ा?
भारत की कई अंतरराष्ट्रीय सीमाएं ऐसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं जहां अवैध सीमा पार आवाजाही सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से चुनौती रही है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ चुनावी और राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा रही है। अब राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में गृह मंत्री के सख्त संदेश के बाद घुसपैठ और अवैध प्रवास के खिलाफ सरकार की नीति को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
