Anmol Sandesh News Desk, सागर।
सागर जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया गया है। सागर के संभागायुक्त और आईजी को बदल दिया गया है। दिलीप कुमार को नया संभागायुक्त और इरशाद वली को सागर रेंज का नया आईजी बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
दिलीप कुमार ने संभागायुक्त का पद संभाला
2006 बैच के IAS अधिकारी दिलीप कुमार ने सागर संभागायुक्त का पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे पहले वे उद्योग आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। उनके पास लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी था। उन्होंने अनिल सुचारी का स्थान लिया है। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जहरीली शराब मामले की जांच, पीड़ितों को उपचार और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराना है।
सागर पहुंचकर CM ने पीड़ितों से जाना हाल
दुबई दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार, 9 सितंबर को सीधे सागर पहुंचे। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों के परिजनों से भी चर्चा की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। सीएम ने मामले में दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की बात कही, जिससे भविष्य में इस तरह के अपराध करने वालों में कड़ा संदेश जाए। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
बंडा-शाहगढ़ के गांवों में बिगड़ी थी लोगों की तबीयत
मामला सागर जिले की बंडा और शाहगढ़ तहसील के कई गांवों से सामने आया। 6 सितंबर को जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद प्रभावित लोगों को सागर जिला अस्पताल, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और बंडा अस्पताल में भर्ती कराया गया। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

30 आरोपियों पर केस, 16 गिरफ्तार
जहरीली शराब मामले में अब तक 30 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में ततरवारा के सरपंच चंद्रभान राजपूत का नाम भी शामिल है। उस पर अवैध शराब बनाने और नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने इनाम घोषित किया है। पुलिस टीमों द्वारा संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
आबकारी से पुलिस तक प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद सरकार ने केवल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रखा है। पुलिस, आबकारी और प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कई अधिकारी-कर्मचारियों को हटाने या उनके तबादले की कार्रवाई की गई है। अब न्यायिक जांच के आदेश के बाद यह भी सामने आने की उम्मीद है कि जहरीली शराब का नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा था और अवैध शराब की बिक्री या निर्माण को रोकने में कहीं प्रशासनिक चूक तो नहीं हुई।
सरकार का संदेश- जनसुरक्षा से समझौता नहीं
सागर की घटना के बाद सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अवैध शराब के कारोबार और उससे जुड़ी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। न्यायिक जांच के साथ पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक बदलाव से मामले की जांच का दायरा बढ़ गया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
