Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
Cyclone Murasu Update: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात मुरासु दक्षिण भारत के तटीय राज्यों के लिए खतरा बनता जा रहा है। चक्रवात तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इसके सोमवार रात 11:30 बजे से मंगलवार सुबह 4 बजे के बीच ओंगोल के आसपास तट से टकराने की आशंका जताई गई है। इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
चक्रवात के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश में प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। NDRF की तीन टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें कुल 90 जवान शामिल हैं। वहीं, खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर 10 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। दूसरी ओर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भारी बारिश के चलते कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं और स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है।
मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में दक्षिण और मध्य भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रह सकता है।
आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा खतरा, समुद्र में उठ रहीं ऊंची लहरें
चक्रवात मुरासु का प्रभाव आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दिखाई देने लगा है। नेल्लोर जिले के मयपाडु बीच पर समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। तटीय क्षेत्रों में मौसम लगातार खराब हो रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार सुबह 5:30 बजे चक्रवात चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर और नेल्लोर से करीब 210 किलोमीटर दूर था। यह लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में इसका प्रभाव अधिक रहने की आशंका जताई गई है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। लोगों को समुद्र के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
90 जवानों की तीन NDRF टीमें तैनात, राहत-बचाव की तैयारी
चक्रवात से निपटने के लिए NDRF की चौथी बटालियन की तीन टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों में कुल 90 जवान शामिल हैं। ये टीमें तमिलनाडु के अरक्कोनम स्थित नागरिककुप्पम से रवाना की गई हैं।
इन जवानों को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर, प्रकाशम और मार्कापुरम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए लगाया गया है। चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने आपातकालीन व्यवस्थाओं को मजबूत किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
चेन्नई में 24 घंटे में 11 सेंटीमीटर बारिश, सड़कें जलमग्न
चक्रवात मुरासु का असर तमिलनाडु में भी साफ दिखाई दे रहा है। चेन्नई, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर में रविवार रात से लगातार बारिश हो रही है। चेन्नई में पिछले 24 घंटे के दौरान माधवरम में सबसे अधिक 11 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि एन्नोर पोर्ट और नुंगमबक्कम में 10-10 सेंटीमीटर बारिश हुई।
भारी बारिश के कारण शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया है। चेन्नई के 22 सबवे में से दो में जलभराव की स्थिति बनी। नगर निगम ने पानी निकालने के लिए पंप और फील्ड टीमों को तैनात किया है।
वहीं, तिरुवल्लूर जिले के पझावेर्काडु इलाके में समुद्र में लगभग 6 फीट ऊंची लहरें उठ रही हैं। एहतियात के तौर पर स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
ओडिशा में भी चक्रवात का असर, 11 फायर स्टेशन अलर्ट पर
ओडिशा के पुरी जिले में भी चक्रवात मुरासु का प्रभाव दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह से कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है और समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं।
रायगढ़ा जिले में प्रशासन ने सभी 11 फायर स्टेशनों की टीमों को अलर्ट पर रखा है। संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए नेशनल हाईवे-326 पर गुम्मा घाटी और मुकुंदपुर घाटी में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
इन मार्गों पर रास्ता बाधित होने या भूस्खलन जैसी स्थिति से निपटने के लिए JCB, एक्सकेवेटर और हाइड्रा क्रेन तैयार रखी गई हैं। प्रशासन की प्राथमिकता सड़क संपर्क बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने की है।

क्या है मुरासु नाम का मतलब?
चक्रवात मुरासु का नाम भारत ने दिया है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ ‘युद्ध का नगाड़ा’ होता है। इस चक्रवात ने 1 नवंबर को बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का रूप लिया और अगले 24 घंटों में गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया।
बंगाल की खाड़ी में एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा चक्रवात बताया जा रहा है। इससे पहले 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में तबाही मचाई थी।
चक्रवात अर्नब की तबाही के बाद अब मुरासु की चुनौती
गौरतलब है कि बंगाल की खाड़ी में इससे पहले उठा चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर की देर रात करीब 3:30 बजे आंध्र प्रदेश के तट से टकराया था। उस दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चली थीं और कई इलाकों में भारी बारिश हुई थी।
इस तूफान के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कुल छह लोगों की मौत हुई थी। आंध्र प्रदेश में 31 मकान क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि करीब 57 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। तूफान के चलते 50 ट्रेनें और विजयवाड़ा एवं विशाखापट्टनम एयरपोर्ट की 21 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। इसके अलावा 16 जिलों में स्कूल भी बंद किए गए थे।
अब अर्नब के बाद मुरासु ने एक बार फिर तटीय राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार दो चक्रवाती तूफानों के कारण बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में मौसम की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का अलर्ट
चक्रवात मुरासु का प्रभाव केवल दक्षिण भारत तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश हो सकती है। इसके अलावा केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी मौसम प्रभावित होने की संभावना है।
मध्यप्रदेश में किसानों और आम लोगों को मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। विशेष रूप से खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों और किसानों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
