Saturday, October 31, 2026
Homeअन्य राज्यDiwali 2026: दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं मिट्टी के दीये? जानिए...

Diwali 2026: दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं मिट्टी के दीये? जानिए धार्मिक आस्था से लेकर पर्यावरण और कुम्हारों की आजीविका तक, क्या है इसका खास महत्व

Anmol Sandesh News Desk | भोपाल, मध्य प्रदेश

Diwali Diya Religious Significance: रोशनी, खुशियों और उल्लास का पर्व दीपावली इस साल 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। रंग-बिरंगी झालरों, सजावटी सामान, रंगोली, मिठाइयों और मिट्टी के दीयों की दुकानें सजने लगी हैं। घरों में भी दीपावली की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

दिवाली पर घर के आंगन, मंदिर, छत और दरवाजों पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। सनातन धर्म में दीपक को शुभता, सकारात्मकता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दीपावली की रात दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिट्टी के दीये जलाने का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है? इसके पीछे भारतीय संस्कृति, लोककला, पर्यावरण और स्थानीय कारीगरों की आजीविका से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू भी हैं। आइए जानते हैं कि आखिर दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है।

1. अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है दीपक

सनातन संस्कृति में दीपक को अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना गया है। दीपावली का नाम भी दीपों की पंक्ति से जुड़ा है। इस दिन लाखों घरों में दीप जलाकर खुशियों और उजाले का स्वागत किया जाता है।

दीपक की लौ हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, ज्ञान, विश्वास और उम्मीद की रोशनी हमेशा रास्ता दिखा सकती है।

इसी वजह से दिवाली पर मिट्टी का दीया जलाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है।

2. सदियों पुरानी भारतीय लोककला और कुम्हारों की परंपरा से जुड़े हैं मिट्टी के दीये

मिट्टी के दीये भारतीय ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक हस्तकला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। देशभर में कुम्हार समुदाय पीढ़ियों से मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर सुंदर दीपक तैयार करता आ रहा है।

चाक पर मिट्टी को आकार देना, उसे सुखाना और पकाकर उपयोगी दीये बनाना कुम्हारों की पारंपरिक कला है।

दिवाली के समय इन दीयों की मांग बढ़ जाती है। छोटे-छोटे दीयों से लेकर सजावटी और रंगीन दीपकों तक, कारीगर अपनी कला और मेहनत से बाजारों को रोशन कर देते हैं।

इस तरह मिट्टी के दीये हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कारीगरी को जीवित रखने का काम भी करते हैं।

3. मिट्टी के दीये खरीदने से कुम्हारों के घरों में भी आती है दिवाली की खुशियां

दिवाली पर जब हम बाजार से मिट्टी के दीये खरीदते हैं, तो इसका सीधा लाभ स्थानीय कुम्हारों और छोटे कारीगरों को मिलता है।

त्योहारी सीजन में दीयों की बिक्री से इन परिवारों की आय बढ़ती है। सालभर मिट्टी के बर्तन और दूसरे हस्तनिर्मित उत्पाद बनाने वाले कारीगरों के लिए दीपावली कमाई का महत्वपूर्ण अवसर होती है।

आज बाजार में बिजली की झालरों और तरह-तरह की सजावटी लाइटों का चलन बढ़ गया है, लेकिन मिट्टी के दीयों की अपनी अलग पहचान और महत्व है।

इस दिवाली स्थानीय कुम्हारों से दीये खरीदना उनकी कला को प्रोत्साहित करने और उनके परिवारों की आजीविका में सहयोग देने का एक अच्छा तरीका हो सकता है।

4. पर्यावरण के लिहाज से कितने बेहतर हैं मिट्टी के दीये?

मिट्टी के दीये प्राकृतिक मिट्टी से बनाए जाते हैं। प्लास्टिक से बनी सजावटी वस्तुओं की तुलना में साधारण मिट्टी के दीये पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हो सकते हैं।

इनके कुछ प्रमुख फायदे हैं:

  • प्राकृतिक सामग्री: सामान्य मिट्टी के दीये प्राकृतिक मिट्टी से तैयार किए जाते हैं।
  • जैविक रूप से विघटित होने की क्षमता: इस्तेमाल के बाद बिना किसी कृत्रिम कोटिंग वाले टूटे दीये समय के साथ मिट्टी में मिल सकते हैं।
  • स्थानीय उत्पादन: इन्हें स्थानीय स्तर पर बनाने और खरीदने से पारंपरिक कारीगरों को रोजगार मिलता है।
  • प्लास्टिक का विकल्प: सजावट में प्लास्टिक आधारित कुछ वस्तुओं की जगह मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि मिट्टी का दीया जलाने पर तेल या घी के दहन से धुआं और कालिख निकल सकती है। इसलिए अच्छी गुणवत्ता का तेल या घी इस्तेमाल करना और घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है।

5. धार्मिक मान्यताओं में दीपक का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके करने की परंपरा है। मंदिरों में आरती, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में दीपक का विशेष स्थान होता है।

दीपावली पर भी माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के दौरान दीपक जलाए जाते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक जलाना अज्ञानता को दूर करके ज्ञान और सद्बुद्धि की ओर बढ़ने का संदेश देता है। दीपक की लौ को शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

इसी कारण दीपावली की शाम घरों के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन और अन्य स्थानों पर दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है।

6. दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा क्यों है खास?

मिट्टी के दीये अपने भीतर भारतीय जीवन के कई सुंदर पहलुओं को समेटे हुए हैं।

  • ये हमारी धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े हैं।
  • भारतीय कुम्हारों की पारंपरिक कला को आगे बढ़ाते हैं।
  • स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबार को प्रोत्साहित करते हैं।
  • अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की जीत का संदेश देते हैं।
  • प्राकृतिक सामग्री से बने होने के कारण सजावट का एक पारंपरिक विकल्प हैं।

यही वजह है कि आधुनिक सजावटी लाइटों के दौर में भी मिट्टी के दीयों की चमक और आकर्षण कम नहीं हुआ है।

इस दिवाली अपनाएं मिट्टी के दीये, रोशन करें अपना घर और किसी का रोजगार

दीपावली सिर्फ घरों को रोशन करने का त्योहार नहीं है, बल्कि खुशियां बांटने, रिश्तों को मजबूत करने और अपनी संस्कृति को सहेजने का अवसर भी है।

इस बार दिवाली पर घर में मिट्टी के दीये जरूर जलाएं। इससे एक ओर भारतीय परंपरा को सम्मान मिलेगा, तो दूसरी ओर स्थानीय कुम्हारों और छोटे कारीगरों की मेहनत को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular