Thursday, November 5, 2026
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ईरान पर हमले से पीछे हटे ट्रंप,इजरायल को भी बड़ा झटका, 4 अरब डॉलर की सैन्य मदद बंद करने का ऐलान; चुनावी हार के बाद बदली अमेरिकी राष्ट्रपति की रणनीति !

Anmol Sandesh News Desk, वॉशिंगटन।

US Iran Israel War: Donald Trump Midterm Election Results: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर अब बदलते नजर आ रहे हैं। ईरान के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाने और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने वाले ट्रंप अब बातचीत और कूटनीति की बात कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने इजरायल को मिलने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना अमेरिकी सैन्य सहायता को इस साल के अंत तक बंद करने की बात कहकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।

ट्रंप के इस बदले रुख को अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों से जोड़कर देखा जा रहा है। 3 नवंबर को हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। शुरुआती चुनावी अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बढ़त हासिल कर ली है। टेक्सास जैसे परंपरागत रिपब्लिकन गढ़ में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत ने अमेरिकी राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है।

इस चुनावी झटके के बाद ट्रंप की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या चुनावी हार के बाद ट्रंप अब ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? क्या इजरायल को दी जाने वाली आर्थिक और सैन्य मदद पर रोक लगाने का फैसला भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा है?

ईरान पर अब हमला नहीं करेंगे ट्रंप? बातचीत से निकालेंगे समाधान

ईरान को लेकर ट्रंप का ताजा बयान पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल ईरान पर नए हमले की कोई योजना नहीं है और दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले भी ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को सकारात्मक बताया था। हालांकि, उनका रुख पूरी तरह युद्ध समाप्त करने की गारंटी नहीं देता। इससे पहले 2 नवंबर को एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने कहा था कि ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई को लेकर उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है। उनका कहना था कि बातचीत को आगे बढ़ने का मौका दिया जाएगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा।

यानी अमेरिका फिलहाल एक तरफ शांति वार्ता की संभावनाएं तलाश रहा है, तो दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी अपने पास रखे हुए है। यही वजह है कि ट्रंप के बयान को युद्ध खत्म होने का अंतिम संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

इजरायल को ट्रंप का बड़ा झटका, 4 अरब डॉलर की मदद होगी बंद

ईरान के साथ तनाव के बीच ट्रंप ने इजरायल को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इजरायल को हर साल दी जाने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सैन्य सहायता इस साल के अंत तक बंद कर देगा।

ट्रंप के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस मुद्दे पर पहले ही सहमति बन चुकी है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इजरायल अब आर्थिक और सैन्य रूप से इतना मजबूत हो चुका है कि उसे अमेरिकी सहायता पर पहले जैसी निर्भरता की जरूरत नहीं है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के बीच मौजूदा सैन्य सहायता समझौता 2028 तक लागू है। ऐसे में सहायता में बदलाव के लिए अमेरिकी कांग्रेस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए ट्रंप के ऐलान को तत्काल प्रभाव से पूरी सहायता बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अमेरिका का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इजरायल लंबे समय से पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे करीबी रणनीतिक सहयोगी रहा है।

चुनाव में ट्रंप को लगा बड़ा झटका, टेक्सास में भी पलटा सियासी खेल

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में जीत की ओर बढ़ते हुए ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

सबसे ज्यादा चर्चा टेक्सास की हो रही है। लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। सीनेट चुनाव में जेम्स तालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को हराया, जबकि गवर्नर चुनाव में जीना हिनोजोसा ने ग्रेग एबॉट को शिकस्त दी।

ट्रंप के समर्थन और प्रचार के बावजूद रिपब्लिकन उम्मीदवारों को मिली हार ने उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी नतीजों से साफ है कि अमेरिकी मतदाताओं के बीच महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और सरकार की नीतियां बड़े मुद्दे बनकर उभरी हैं।

अब डेमोक्रेट्स के पास संसद के दोनों सदनों में मजबूत स्थिति होने से ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच और विरोध की संभावना भी बढ़ गई है।

अमेरिका-ईरान युद्ध का भारत पर भी पड़ रहा असर

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, गैस आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है।

इस पूरे संकट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। युद्ध और सुरक्षा संबंधी खतरे के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।

भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने पर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की लागत बढ़ने का खतरा रहता है। वहीं, गैस आपूर्ति प्रभावित होने से घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी दबाव पड़ सकता है।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, यह तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

चुनाव से पहले भी हुआ था ईरान पर हमला, ट्रंप के बयान पर क्यों उठ रहे सवाल?

ट्रंप के शांति संबंधी बयानों के बावजूद ईरान के साथ तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष कई महीनों से वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले भी ईरान से जुड़े सैन्य हमलों की खबरें सामने आई थीं। ईरान के कश्म द्वीप के आसपास धमाकों की खबरों ने तनाव को और बढ़ा दिया था। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे किसका हाथ था, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

वहीं, चुनाव की पूर्व संध्या पर भी क्षेत्र में नए हमलों की खबरों ने शांति वार्ता की संभावनाओं पर सवाल खड़े किए। ऐसे में ट्रंप के बयान और जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं और बातचीत की संभावनाओं के साथ सैन्य विकल्प को भी खुला रखा है। इसलिए केवल बयान के आधार पर युद्ध समाप्त होने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

क्या चुनावी हार के बाद ट्रंप बदल रहे हैं अपनी रणनीति?

ट्रंप के बदले रुख के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू राजनीति और मिडटर्म चुनाव के नतीजे माने जा रहे हैं। युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं।

चुनाव में मिली हार के बाद ट्रंप प्रशासन को अब संसद में डेमोक्रेट्स के मजबूत विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी नीतियों और विदेश नीति से जुड़े फैसलों को लागू करना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।

इसके अलावा, इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर ट्रंप का बयान भी अमेरिकी घरेलू राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है। इजरायल को अमेरिकी सहायता देने के मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज रही है। ऐसे में ट्रंप का यह ऐलान उनकी विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू राजनीतिक संदेश भी हो सकता है।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ ट्रंप ईरान के साथ बातचीत की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य विकल्प को भी खुला रखे हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली शांति वार्ता और अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसले तय करेंगे कि पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम होगा या तनाव एक बार फिर बढ़ेगा।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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