Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में फिर तेजी दर्ज की गई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में भारत में भी पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं? हालांकि, फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। देशभर में सोमवार सुबह भी ईंधन के दाम स्थिर रहे।

कच्चे तेल की कीमत में आया उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत करीब 69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी। लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद सोमवार को इसमें तेजी आई और कीमत बढ़कर 73.39 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आने वाले समय में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं
देश की सरकारी तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं। आज जारी ताजा अपडेट के अनुसार देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।यानी फिलहाल वाहन चालकों को राहत मिली हुई है और ईंधन पुराने दामों पर ही उपलब्ध है।

क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमत?
- मिडिल ईस्ट में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव।
- अमेरिका और ईरान के बीच टकराव से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका।
- वैश्विक बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ी।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता।
आगे क्या हो सकता है?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकारी तेल कंपनियां और केंद्र सरकार की मूल्य निर्धारण प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा।
पेट्रोल-डीजल भरवाने से पहले करें यह काम
यदि आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले अपने शहर के ताजा ईंधन रेट जरूर जांच लें, क्योंकि अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य करों के कारण कीमतों में अंतर होता है।फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि मिडिल ईस्ट का तनाव बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
