Anmol Sandesh News Desk, न्यूजीलैंड
India-New Zealand Free Trade Agreement: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर कारोबार जगत में चर्चा तेज है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, आयात शुल्क की बाधाएं कम करना और भारतीय उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में अवसर बढ़ाना है। समझौते के तहत कपड़ा, फुटवियर, चमड़े के उत्पाद, दवाइयां और इंजीनियरिंग से जुड़े सामान जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसका संभावित लाभ केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं है। भारतीय निर्यातकों, विनिर्माण कंपनियों और कुछ पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि, किसी उत्पाद को मिलने वाली वास्तविक शुल्क रियायत उसके मूल देश, उत्पाद की श्रेणी और समझौते की संबंधित शर्तों पर निर्भर करेगी।
भारत-न्यूजीलैंड FTA से क्या बदलेगा?
मुक्त व्यापार समझौता यानी Free Trade Agreement ऐसा समझौता होता है, जिसके तहत दो या अधिक देश आपसी व्यापार में कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करते हैं या समाप्त करते हैं। इससे दूसरे देश के बाजार में सामान बेचना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
दिए गए विवरण के अनुसार, न्यूजीलैंड में पहले कई भारतीय उत्पादों पर लगभग 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगने की बात कही गई है। समझौते के तहत पात्र भारतीय उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलने से उनकी लागत और प्रतिस्पर्धा पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
यदि आयात शुल्क में छूट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचता है, तो न्यूजीलैंड में भारत में बने कुछ सामान पहले के मुकाबले सस्ते हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम खुदरा कीमत पर परिवहन, बीमा, वितरण लागत, विनिमय दर और विक्रेता का मार्जिन भी असर डालते हैं।
किन भारतीय उत्पादों को मिल सकता है फायदा?
समझौते के विवरण में कई ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख है, जिनके निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
- कपड़े और टेक्सटाइल: भारतीय परिधान और कपड़ा उत्पादों को शुल्क में राहत मिलने से न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- जूते और फुटवियर: भारत में बने जूतों और अन्य फुटवियर उत्पादों की लागत पर आयात शुल्क में छूट का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- चमड़े के उत्पाद: बैग, चमड़े के सामान और अन्य संबंधित उत्पाद बनाने वाली भारतीय कंपनियों को नए व्यापारिक अवसर मिल सकते हैं।
- दवाइयां: भारतीय दवा उद्योग के लिए न्यूजीलैंड में बाजार पहुंच बेहतर होने की संभावना है। हालांकि, दवाओं के आयात पर लागू गुणवत्ता, पंजीकरण और नियामकीय नियम अलग से पूरे करने होंगे।
- इंजीनियरिंग उत्पाद: मशीनरी, उपकरण और अन्य पात्र इंजीनियरिंग सामान के निर्यातकों को शुल्क संबंधी राहत से फायदा मिल सकता है।
इन उत्पादों पर वास्तविक छूट की सीमा संबंधित टैरिफ सूची और समझौते के नियमों से तय होगी। इसलिए सभी उत्पादों को बिना किसी शर्त के शुल्क-मुक्त मानना सही नहीं होगा।
भारत के किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है?
सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, समझौते के लागू होने के पहले दिन से न्यूजीलैंड में भारत के 100% निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसमें टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग और कृषि-प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
किन उत्पादों को समझौते से बाहर रखा गया है?
भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और घरेलू क्षेत्रों के हितों की रक्षा के लिए कुछ उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डेयरी उत्पाद, जैसे दूध, क्रीम और पनीर
- प्याज, चना, मटर और मक्का
- बादाम और चीनी
- कृत्रिम शहद
- कुछ पशु एवं वनस्पति वसा और तेल
इन अपवादों का उद्देश्य घरेलू किसानों और संबंधित उद्योगों के हितों की रक्षा करना है।
न्यूजीलैंड को क्या फायदा होगा?
FTA से भारत को निर्यात बढ़ाने के अवसर मिलेंगे, वहीं न्यूजीलैंड को भी भारतीय बाजार में अपने उत्पाद बेचने में शुल्क संबंधी राहत मिलेगी। न्यूजीलैंड के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, उसके भारत को होने वाले मौजूदा निर्यात के 95% हिस्से को समय के साथ शुल्क में छूट या कमी का लाभ मिलेगा।
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लगभग 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस समझौते के साथ निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबार को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है।
भारतीय प्रोफेशनल्स और युवाओं के लिए भी अवसर
इस समझौते में रोजगार और लोगों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। न्यूजीलैंड की इमिग्रेशन एजेंसी के अनुसार, समझौते के तहत कुछ कुशल पेशेवरों के लिए नए अस्थायी रोजगार वीजा मार्ग, पात्र भारतीय छात्रों के लिए कुछ अतिरिक्त सुविधाएं और वर्किंग हॉलिडे योजना जैसे प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इनके लिए योग्यता, नौकरी के प्रस्ताव और अन्य वीजा शर्तें लागू रहेंगी।
भारत-न्यूजीलैंड FTA कब लागू हुआ?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना, भारतीय निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराना और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
