Anmol Sandesh News Desk, जबलपुर
MP News: मध्य प्रदेश की सरकारी साइकिल योजना में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में लगातार हो रही देरी को लेकर कोर्ट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित विभाग की ओर से जांच की अनुमति दी जा चुकी है, तो कार्रवाई आगे बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है। मामला रायसेन जिले में स्कूली छात्राओं को साइकिल खरीदने के लिए दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि योजना के तहत उपलब्ध कराई गई राशि में गड़बड़ी और उसके कथित दुरुपयोग की शिकायत सामने आई थी।
शिकायत के बाद EOW जांच की मांग
मामले में शिकायत सामने आने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से जांच कराने की मांग की गई थी। बताया गया कि संबंधित विभाग की ओर से जांच की अनुमति भी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। जांच में देरी के चलते मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने EOW की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अनुमति मिलने के बावजूद जांच अब तक पूरी क्यों नहीं की गई।
EOW DG खुद हाईकोर्ट में हुए पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW के DG उपेंद्र जैन स्वयं हाईकोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। EOW DG ने कोर्ट के समक्ष अंडरटेकिंग देते हुए भरोसा दिलाया कि अगले 60 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी जाएगी।
अब 60 दिन में सामने आएगी जांच की स्थिति
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले में जांच की प्रगति पर नजर रहेगी। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी योजना की राशि में वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता या गबन हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद EOW पर जांच को तय समयसीमा में पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। 60 दिन की समयसीमा में जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करना अब जांच एजेंसी के लिए अहम चुनौती होगी।
