Monday, October 26, 2026
Homeअन्य राज्यJamia University News: जामिया में बवाल के बाद इमरान मसूद समेत कांग्रेस...

Jamia University News: जामिया में बवाल के बाद इमरान मसूद समेत कांग्रेस नेताओं पर FIR, छात्र संघ चुनाव को लेकर बढ़ा विवाद

Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली

Jamia University Protest: दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन की शिकायत पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और अन्य नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर है। आरोप है कि नेताओं ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए उन्हें उकसाया और विश्वविद्यालय परिसर में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

वहीं, छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर विद्यार्थियों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई, छात्रों की हिरासत और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जामिया का छात्र आंदोलन अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

इमरान मसूद और अन्य नेताओं के खिलाफ क्या हैं आरोप?

विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और अन्य कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। शिकायत में प्रदर्शनकारी छात्रों को उकसाने और परिसर में जबरन प्रवेश की कोशिश करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार 23 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में जामिया पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में लिया था। अब विश्वविद्यालय प्रबंधन की शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि एफआईआर दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप का दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

गेट नंबर-7 पर पुलिस कार्रवाई, छात्रों की हिरासत पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान जामिया के गेट नंबर-7 के बाहर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद सामने आया। छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को हिरासत में लिया।

इस घटनाक्रम से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है, जिनमें पुलिसकर्मी छात्रों को हिरासत में लेते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि और उसमें दिखाई दे रही कार्रवाई की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच जारी तनाव के कारण कैंपस का माहौल भी प्रभावित हुआ है। आंदोलनकारी छात्र चुनाव कराने की मांग पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन की ओर से आंदोलन समाप्त करने के लिए बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

2006 से नहीं हुए छात्र संघ चुनाव, दो सप्ताह से प्रदर्शन

जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर विवाद नया नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2006 के बाद से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विद्यार्थी पिछले करीब दो सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान चार छात्रों के 13 दिनों से भूख हड़ताल पर रहने की जानकारी भी सामने आई है। छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था बहाल हो और चुनाव कराने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।

लंबे समय से जारी आंदोलन के चलते शैक्षणिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए कक्षाएं ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के गेट और लाइब्रेरी को अगले आदेश तक बंद किए जाने की जानकारी दी गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी के नेतृत्व में करीब डेढ़ हजार शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी गेट नंबर-7 पर पहुंचे थे। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों से लगभग दो घंटे तक बातचीत की गई और उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए समझाने की कोशिश की गई।

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके टेंट हटाए गए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इस तरह विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है।

छात्र संघ चुनाव के संविधान के लिए सात सदस्यीय समिति

विवाद के बीच विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस समिति का उद्देश्य चुनाव से संबंधित नियमों और प्रक्रिया के प्रारूप पर काम करना बताया जा रहा है।

हालांकि, छात्र संगठन SFI की मांग है कि समिति में उनके प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। छात्रों का कहना है कि चुनाव से जुड़े नियम तैयार करने की प्रक्रिया में विद्यार्थियों और उनके संगठनों की भागीदारी होनी चाहिए।

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच सहमति कैसे बनेगी और छात्र संघ चुनाव कराने की दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

जामिया विवाद में आगे क्या?

इमरान मसूद समेत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर की खबर के बाद यह विवाद विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। एक ओर छात्र चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था और परिसर की स्थिति को लेकर कदम उठा रहा है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular