Anmol Sandesh News Desk, भोपाल।
Maa Rajarajeshwari Koti Haridra Kunkumarchana: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शरद पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार, 26 अक्टूबर को मां राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन का भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। लाल परेड ग्राउंड में शाम 7 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने और लगभग ढाई घंटे में एक करोड़ अर्चन किए जाने का लक्ष्य है। संत श्री रावतपुरा सरकार के सान्निध्य में होने वाले इस अनुष्ठान के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजन को भव्य और विशेष बनाने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों के साथ नेपाल से भी पूजन सामग्री मंगाई गई है।
इस धार्मिक आयोजन में मां राजराजेश्वरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, अनुष्ठान में करीब 238 प्रकार की सामग्री का उपयोग होगा। नेपाल के रुद्राक्ष, केरल के चांदी के सिक्के, गुजरात की साड़ियां, ओडिशा के नारियल, पश्चिम बंगाल के पान के पत्ते और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से मंगाए गए फूल, बिल्व पत्र, फल और अन्य पूजन सामग्री इस आयोजन का हिस्सा होंगे।
देशभर से जुटाई गई पूजन सामग्री
मां राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन को लेकर विभिन्न राज्यों से विशेष सामग्री मंगाई गई है। आयोजन में शामिल वस्तुओं की मात्रा और विविधता इसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।
- नेपाल: पूजा-अर्चना के लिए रुद्राक्ष मंगाए गए हैं।
- केरल: 1,100 चांदी के सिक्के मंगाए गए हैं, जिन्हें समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- गुजरात के सूरत से: 11,000 साड़ियां मंगाई गई हैं।
- ओडिशा: 31,000 साबुत नारियल की व्यवस्था की गई है।
- पश्चिम बंगाल के कोलकाता से: 21,000 साबुत पान के पत्ते मंगाए गए हैं।
- महाराष्ट्र के भुसावल से: 21 टन केले मंगाए गए हैं।
- जम्मू से: 10 क्विंटल सेब लाए गए हैं।
- उत्तर प्रदेश के झांसी से: एक लाख दीये मंगाए गए हैं।
- छत्तीसगढ़ के रायपुर से: 21 क्विंटल चावल की व्यवस्था की गई है।
- आगरा से: 11 क्विंटल पेड़े मंगाए गए हैं।
इन सामग्रियों का उपयोग अनुष्ठान की विभिन्न धार्मिक प्रक्रियाओं और पूजा-अर्चना में किया जाएगा। अलग-अलग क्षेत्रों की सामग्री को एक आयोजन में शामिल करने के पीछे धार्मिक परंपराओं और श्रद्धा का विशेष महत्व है।
मध्य प्रदेश के इन जिलों से भी आएगी सामग्री
इस आयोजन में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों की सामग्री भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रदेश के कई क्षेत्रों से फूल, फल, मिठाइयां और पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं जुटाई गई हैं।
- टीकमगढ़: 11,000 कमल के फूल।
- इंदौर और खंडवा: 50 क्विंटल विभिन्न प्रकार के फूल।
- इंदौर: 5 क्विंटल पंचमेवा।
- पन्ना: 11 लाख बिल्व पत्र।
- नरसिंहपुर: 21 क्विंटल गुड़ और 11,000 गन्ने।
इसके अलावा, सब्जियां, मिठाइयां, औषधियां और अन्य पूजन सामग्री भी शामिल की जाएगी। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री की व्यवस्था आयोजन की व्यापक तैयारियों को दर्शाती है।
शाम 7 बजे से शुरू होगा अनुष्ठान
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजन के लिए भव्य मंच तैयार किया गया है। सोमवार शाम 7 बजे से शुरू होने वाला यह अनुष्ठान लगभग ढाई घंटे तक चलने का कार्यक्रम है। इसमें करीब 50 हजार श्रद्धालुओं की भागीदारी का अनुमान है।
आयोजन का प्रमुख आकर्षण एक करोड़ अर्चन का संकल्प है। मां राजराजेश्वरी की आराधना के लिए श्रद्धालु एक साथ जुटेंगे और निर्धारित धार्मिक विधि के अनुसार पूजा-अर्चना करेंगे। आयोजन की तैयारियों में पूजन सामग्री जुटाने से लेकर मंच और कार्यक्रम की व्यवस्था तक पर विशेष ध्यान दिया गया है।
क्या है कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन का धार्मिक महत्व?
हिंदू धार्मिक परंपरा में कुंकुमार्चन देवी की पूजा का एक विशेष विधान है। इसमें कुंकुम के माध्यम से देवी की आराधना की जाती है। हरिद्रा का अर्थ हल्दी से है, जबकि कोटि का अर्थ एक करोड़ होता है। इस प्रकार कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन का आयोजन बड़े पैमाने पर देवी की आराधना और सामूहिक धार्मिक संकल्प से जुड़ा है।
मां राजराजेश्वरी को देवी शक्ति के स्वरूप में पूजने की परंपरा है। श्रद्धालु इस तरह के अनुष्ठानों में सुख, समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना करते हैं। शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भक्तों को सामूहिक पूजा-अर्चना का अवसर प्रदान करेगा।
भोपाल में बड़े धार्मिक आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी
लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस अनुष्ठान में देश के विभिन्न राज्यों से लाई गई सामग्री और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी मुख्य आकर्षण रहेगी। नेपाल के रुद्राक्ष से लेकर केरल के चांदी के सिक्कों और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए फूलों व बिल्व पत्रों तक, आयोजन में विविध धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
सोमवार शाम होने वाले इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की उपस्थिति, एक करोड़ अर्चन का संकल्प और विशाल स्तर पर की गई पूजन सामग्री की व्यवस्था इसे भोपाल के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में एक खास स्थान देती है।
