Anmol Sandesh News Desk,कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।सूत्रों के मुताबिक सोमवार दोपहर केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर एक अहम बैठक हुई। बैठक में कई सांसद शामिल हुए और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा की गई। इसके बाद सांसदों द्वारा NDA को समर्थन देने और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजने की बात सामने आई है।

सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चाएं
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से भी सांसदों की मुलाकात हुई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि असंतुष्ट सांसद नया गुट बना सकते हैं या किसी अन्य राजनीतिक दल अथवा गठबंधन के साथ जा सकते हैं।बताया जा रहा है कि बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी सहित कई सांसद मौजूद रहे। हालांकि बैठक में शामिल सभी सांसदों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया पत्र
सूत्रों के अनुसार असंतुष्ट सांसदों ने अपने फैसले की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दी है। बताया जा रहा है कि जल्द ही सांसद व्यक्तिगत रूप से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रख सकते हैं।
दल-बदल कानून पर भी चर्चा
वर्तमान में लोकसभा में TMC के 28 सांसद और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दो-तिहाई से अधिक सांसद किसी अलग गुट के रूप में सामने आते हैं, तो दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत स्थिति अलग हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के आधार पर ही होगा।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ी अंदरूनी नाराजगी
विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। पहले कुछ विधायकों के अलग रुख अपनाने की चर्चाएं हुईं, वहीं अब सांसदों के फैसले ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा पुनर्गठन देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें ममता बनर्जी और TMC नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
