Saturday, May 30, 2026
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट जारी,घरेलू हिंसा और बाल विवाह में कमी, लेकिन महिलाओं में मोटापा बढ़ा, 96.5% घरों तक पहुंचा साफ पानी

Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई अहम आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार देश में घरेलू हिंसा और बाल विवाह के मामलों में कमी दर्ज की गई है, वहीं महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है।

घरेलू हिंसा और बाल विवाह में आई कमी

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में विवाहित महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की दर 29.2% से घटकर 22.3% हो गई है। वहीं बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2019-21 में जहां यह आंकड़ा 23.3% था, वहीं अब घटकर 20.1% रह गया है।

कामकाजी महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। अब 30.8% महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 25.4% था।

महिलाओं में मोटापा 7% बढ़ा

सर्वे के अनुसार महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले सर्वे की तुलना में मोटापा 7 प्रतिशत अंक बढ़कर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है।

राज्यों की बात करें तो आंध्र प्रदेश और सिक्किम (48%) में महिलाओं में मोटापे की दर सबसे अधिक है, जबकि केरल (46.7%) भी शीर्ष राज्यों में शामिल है। दूसरी ओर मेघालय (13.8%) और झारखंड (16.9%) में मोटापा सबसे कम पाया गया।

बिजली और साफ पानी की पहुंच बढ़ी

देश में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब 98.3% घरों तक बिजली और 96.5% घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंच चुका है।

महिलाओं के बीच डिजिटल पहुंच भी तेजी से बढ़ी है। इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 64.3% हो गया है, जो पिछले सर्वे की तुलना में लगभग दोगुना है।

महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार देश के 18.8% परिवारों में महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक है। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 14% था।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत 19.1% और शहरी क्षेत्रों में 18.2% दर्ज किया गया है।

बच्चों के पोषण में सुधार, लेकिन चुनौती बरकरार

कुपोषित बच्चों में नाटेपन (Stunting) की समस्या में कमी आई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 35.5% था, जो अब घटकर 29.3% रह गया है।

हालांकि बच्चों के पोषण को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 6 महीने से 2 साल तक के केवल 15.3% बच्चों को ही संतुलित और पर्याप्त आहार मिल रहा है, जबकि लगभग 85% बच्चे आवश्यक पोषण से वंचित हैं।

स्तनपान और परिवार नियोजन में गिरावट

सर्वे में यह भी सामने आया कि जन्म के बाद शुरुआती 6 महीनों तक केवल स्तनपान कराने की दर 63.7% से घटकर 55.8% रह गई है।

इसके अलावा परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत भी 56.4% से घटकर 52.7% हो गया है।

निजी अस्पतालों में रिकॉर्ड स्तर पर सिजेरियन डिलीवरी

देश में निजी अस्पतालों में होने वाली सिजेरियन डिलीवरी 54.1% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

बिहार में सबसे ज्यादा वैवाहिक हिंसा

राज्यवार आंकड़ों में केरल बाल विवाह के मामले में सबसे सुरक्षित राज्य साबित हुआ, जहां यह दर केवल 2.9% है।

वहीं पश्चिम बंगाल (36.4%) और बिहार (34.6%) में बाल विवाह के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए।

वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश (4.3%) सबसे सुरक्षित राज्य है, जबकि बिहार में 36.1% महिलाएं वैवाहिक हिंसा का शिकार होती हैं, जो देश में सबसे अधिक है।

WHO रिपोर्ट: भारत में 30% महिलाओं ने झेली पार्टनर हिंसा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में करीब 30% महिलाएं अपने जीवन में कभी न कभी इंटीमेट पार्टनर वॉयलेंस यानी पति या पार्टनर द्वारा मानसिक, आर्थिक, शारीरिक या यौन हिंसा का सामना कर चुकी हैं।

रिपोर्ट बताती है कि 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की हर पांचवीं महिला किसी न किसी रूप में ऐसी हिंसा से प्रभावित है। वहीं भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 4% महिलाओं ने गैर-पार्टनर द्वारा यौन हिंसा झेलने की बात भी स्वीकार की है।

तस्वीर मिली-जुली

NFHS-6 रिपोर्ट से साफ है कि देश में घरेलू हिंसा, बाल विवाह, कुपोषण और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में सुधार हुआ है। हालांकि महिलाओं में बढ़ता मोटापा, बच्चों में पोषण की कमी, स्तनपान दर में गिरावट और परिवार नियोजन के कम होते उपयोग जैसी चुनौतियां अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। देश के स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के लिए इन मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

 

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