Anmol Sandesh News Desk, न्यूयॉर्क
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने अपने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के बयानों का जवाब दिया। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर, अल्पसंख्यकों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े दावों पर सवाल उठाए।
कौन हैं पेटल गहलोत?
पेटल गहलोत संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखने वाली भारतीय राजनयिक के तौर पर वह पहले भी संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर पाकिस्तान के बयानों का जवाब दे चुकी हैं। जुलाई 2026 में भी उन्होंने यूएन के एक मंच पर पाकिस्तान के बयानों के जवाब में भारत का पक्ष रखा था। 26 सितंबर को उनका नाम उस समय सुर्खियों में आया, जब उन्होंने शहबाज शरीफ के UNGA संबोधन के बाद भारत की ओर से जवाब दिया।
9/11 और ओसामा बिन लादेन का किया जिक्र
पेटल गहलोत ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है क्योंकि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में पाकिस्तानी सेना की प्रमुख सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयानों पर सवाल उठाते हुए आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखा।
‘सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन’ का आरोप
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों की बातें ऐसे शासन से सुनने को मिलीं, जिसे उन्होंने “सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए” शासन बताया। उन्होंने पाकिस्तान में सेना की भूमिका और नागरिक शासन को लेकर भारत की आपत्ति सामने रखी। यह टिप्पणी भारत की ओर से पाकिस्तान के राजनीतिक और लोकतांत्रिक दावों के जवाब में की गई थी।
‘फॉर्म 47 सरकार’ का भी जिक्र
अपने संबोधन में पेटल गहलोत ने ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का इस्तेमाल किया। यह संदर्भ पाकिस्तान के चुनावों के बाद सरकार की वैधता को लेकर वहां होने वाली राजनीतिक बहस से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग जिस सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं, उससे ऐसे बयानों की अपेक्षा की जा सकती है। यह टिप्पणी पाकिस्तान की घरेलू चुनावी राजनीति पर भारत की प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई।
कश्मीर पर भारत का रुख दोहराया
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पेटल गहलोत ने भारत की पुरानी और आधिकारिक स्थिति दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के जवाब में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख किया और वहां के लोगों के अधिकारों तथा हिंसा से जुड़े मुद्दे उठाए।
आतंकवाद पर भारत का कड़ा संदेश
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद, छल और दोहरेपन के जरिए पाकिस्तान को लाभ नहीं मिलेगा। उनका बयान भारत के उस आधिकारिक रुख के अनुरूप था, जिसमें सीमा पार आतंकवाद को भारत-पाकिस्तान संबंधों का प्रमुख मुद्दा बताया जाता है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा भी उठाया
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान द्वारा धार्मिक असहिष्णुता और मानवीय मूल्यों पर की गई टिप्पणियों का भी जवाब दिया। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और ईशनिंदा कानूनों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक या आदर्शवादी बातें दुनिया को वास्तविक स्थिति से गुमराह नहीं कर सकतीं। यह टिप्पणी पाकिस्तान के UNGA संबोधन में मानवाधिकार और धार्मिक मुद्दों के संदर्भ के जवाब में थी।
शहबाज शरीफ ने UN में क्या कहा था?
पेटल गहलोत का जवाब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के UNGA संबोधन के बाद आया। शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान तनाव और सिंधु जल संधि समेत कई मुद्दे उठाए। उन्होंने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का भी उल्लेख किया। भारत ने पहले भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से जुड़े दावों को स्वीकार नहीं किया है और अपने जवाब में आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता दी।
पेटल गहलोत का संदेश क्या रहा?
यूएन में भारत की ओर से दिए गए जवाब का मुख्य फोकस आतंकवाद, कश्मीर, पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर रहा। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों को स्वीकार करने के बजाय भारत का आधिकारिक पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी बात को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाती। भारत ने पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के आरोपों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया।
