Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुने गए शिक्षकों से संवाद किया। बातचीत के दौरान माहौल उस समय खास हो गया, जब प्रधानमंत्री ने खुद एक महिला शिक्षक से सवाल करते हुए पूछा कि अगर मैं आपका विद्यार्थी होता और मुझे एक अच्छा पब्लिक स्पीकर बनना होता तो मुझे क्या करना चाहिए? महिला शिक्षक ने जवाब दिया कि अच्छे वक्ता के लिए सबसे पहले कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्वास जरूरी है। इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए पूछा कि आखिर यह कॉन्फिडेंस आएगा कैसे? शिक्षक ने कहा कि आत्मविश्वास एक दिन में नहीं आता, इसके लिए लगातार प्रैक्टिस करनी पड़ती है। प्रधानमंत्री और शिक्षक के बीच हुई यह छोटी-सी बातचीत सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी। बातचीत का वीडियो प्रधानमंत्री के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध कराया गया है।
स्क्रीन टाइम पर PM की चिंता- मोबाइल से ज्यादा मैदान जरूरी
शिक्षकों के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज स्क्रीन टाइम एक तरह की आदत या लत का रूप लेता जा रहा है। इससे बच्चों को बाहर निकालने का एक प्रभावी तरीका उन्हें वास्तविक खेलों और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ना हो सकता है। प्रधानमंत्री ने खास तौर पर वीडियो गेम और मैदान में खेले जाने वाले खेलों के बीच अंतर बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि बच्चे अगर खेल के मैदान में समय बिताना शुरू करें और किसी खेल में रुचि विकसित करें, तो उनका ध्यान लगातार स्क्रीन पर रहने से हटाया जा सकता है।
बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर नजर रखें शिक्षक
बातचीत के दौरान बच्चों के बदलते व्यवहार को समझने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। शिक्षकों की भूमिका सिर्फ किताब और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के व्यवहार, उनकी मानसिक स्थिति, उनकी आशंकाओं और उनके सामाजिक परिवेश में आने वाले बदलावों को समझना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है। शिक्षकों से अपेक्षा की गई कि वे बच्चों के व्यवहार में दिखाई देने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। यदि किसी विद्यार्थी में अचानक बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे के कारण को समझने की कोशिश की जानी चाहिए।
ड्रेस कोड पर भी हुई चर्चा
बातचीत में ड्रेस कोड से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में इस तरह के मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता की कमी और नियमों को बिना पर्याप्त स्पष्टीकरण के लागू करना विवाद की वजह बन सकता है। इस चर्चा का व्यापक संदेश यही रहा कि शिक्षा संस्थानों में नियम जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ संवाद और स्पष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

5 सितंबर को 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार
शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 प्रदान कर रही हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इन शिक्षकों का चयन तीन चरणों की प्रक्रिया के तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। चयनित शिक्षकों में 26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक शामिल हैं। ये शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के छह संगठनों से चुने गए हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को राष्ट्रीय पहचान देना है जिन्होंने स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों के सीखने में योगदान देने और शिक्षण के नए तरीकों को अपनाने में उल्लेखनीय काम किया है। समारोह में प्रत्येक पुरस्कार विजेता के कार्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
सिर्फ स्कूल शिक्षक नहीं, उच्च शिक्षा के शिक्षक भी सम्मानित
इस वर्ष शिक्षक दिवस पर सम्मान का दायरा स्कूल शिक्षा तक सीमित नहीं है। राष्ट्रपति उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक से जुड़े 21 शिक्षकों/फैकल्टी सदस्यों को भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कर रही हैं। इनमें केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों से 12, राज्य विश्वविद्यालयों/कॉलेजों से पांच और पॉलिटेक्निक संस्थानों से चार शिक्षक शामिल हैं। इस तरह शिक्षक दिवस का यह आयोजन स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक देश के उन शिक्षकों के योगदान को सामने ला रहा है, जिन्होंने विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
2024 में भी PM ने पुरस्कार विजेताओं से किया था संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से पहले भी बातचीत करते रहे हैं। 2024 में भी उन्होंने पुरस्कार विजेता शिक्षकों से संवाद किया था। उस दौरान अलग-अलग राज्यों से आए शिक्षकों ने स्थानीय भाषा, शिक्षा के माध्यम और विद्यार्थियों की जरूरतों से जुड़े अनुभव साझा किए थे। इस तरह की बातचीत का उद्देश्य केवल सम्मानित शिक्षकों को बधाई देना नहीं, बल्कि उनके काम करने के तरीकों और जमीनी अनुभवों को सामने लाना भी है।
2025 में भी शिक्षकों से हुई थी मुलाकात
पिछले वर्ष भी शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों से मुलाकात की थी। इस दौरान शिक्षा, बच्चों की बदलती जरूरतों, तकनीक और देश में हो रहे बदलावों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी।
शिक्षक दिवस का असली संदेश
इस पूरे संवाद का सबसे बड़ा संदेश यही निकलकर सामने आया कि आज शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है। बच्चों को आत्मविश्वास देना, उन्हें तकनीक के संतुलित इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना, खेलों से जोड़ना, उनके व्यवहार में बदलाव पहचानना और उन्हें बेहतर संवादकर्ता बनाना भी आधुनिक शिक्षक की जिम्मेदारी का हिस्सा बन चुका है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कारों के जरिए उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान और प्रधानमंत्री द्वारा उनके अनुभवों पर सीधा संवाद इसी व्यापक भूमिका को रेखांकित करता है।
