Anmol Sandesh News Desk | भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने शहीद जवानों को नमन किया, सलामी ली और देश की सुरक्षा, लोकतंत्र की रक्षा तथा मध्य प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त कराने में पुलिस बल के योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लोकतंत्र को सुरक्षित रखने में सशस्त्र बलों और पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
‘लोकतंत्र को बचाने का श्रेय पुलिस और सशस्त्र बलों को’
लाल परेड ग्राउंड में पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश की एकता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा में पुलिस तथा सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने कहा कि लाल चौक से लाल किले तक तिरंगा फहराने और देश की संप्रभुता बनाए रखने में हमारे सुरक्षा बलों की भूमिका अहम रही है।
मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
‘मध्य प्रदेश नक्सलवाद से बाहर आया’, CM ने किया पुलिस के योगदान का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नक्सलवाद की चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का दौर काफी कठिन रहा और इससे निपटने में पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने मध्य प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने में पुलिस के योगदान की सराहना की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने में सफलता मिली।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में काम किया है। ऐसे में पुलिस स्मृति दिवस उन सभी कर्मियों के योगदान और बलिदान को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने आंतरिक सुरक्षा के लिए अपनी जान गंवाई।
इन शहीद पुलिसकर्मियों को CM ने किया नमन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश के उन वीर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
शहीद जवानों की सूची:
- शहीद आशीष शर्मा — निरीक्षक, विशेष सशस्त्र बल
- शहीद अशोक शर्मा — उप निरीक्षक
- शहीद मदनलाल निनामा — सहायक उप निरीक्षक
- शहीद परिमाल सिंह तोमर — प्रधान आरक्षक
- शहीद ओम प्रकाश भवेदी — कार्यवाहक प्रधान आरक्षक
- शहीद सर्जन सिंह भील — कार्यवाहक प्रधान आरक्षक
- शहीद आरती पाल — महिला आरक्षक
- शहीद महेश प्रसाद पाठक — आरक्षक
- शहीद विकास चतुर्वेदी — आरक्षक
इन जवानों का स्मरण करते हुए पुलिस बल के त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया गया।
शहीद के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता का जिक्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने शहीद के परिवार को मिलने वाली एक करोड़ रुपये की राशि को माता-पिता और पत्नी के बीच आधा-आधा बांटने का निर्णय लिया है।
इस व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री के वक्तव्य के अनुसार, 50 लाख रुपये माता-पिता और 50 लाख रुपये पत्नी को दिए जाने की बात कही गई।
यह विषय शहीदों के परिवारों के आर्थिक सहयोग और उनके प्रति सरकार की जिम्मेदारी से जुड़ा है। इस संबंध में लागू नियमों और पात्रता की पुष्टि आधिकारिक सरकारी आदेश से की जानी चाहिए।
पुलिस विभाग में भर्ती और पदोन्नति पर CM का बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने अपनी दक्षता और समर्पण से मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने पुलिस विभाग को विशेष महत्व देने की बात कही और भर्ती तथा पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस बैंड और होमगार्ड में जहां जरूरत होगी, वहां भर्ती की जाएगी।
इस बयान के बाद पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं की नजर आगामी अधिसूचनाओं पर रहेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य में नई भर्तियों की संख्या, आवेदन की तारीख और पदवार विवरण स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
कार्यक्रम में DGP कैलाश मकवाना भी रहे मौजूद
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके बलिदान को याद करने के साथ पुलिस बल की भूमिका पर जोर दिया गया।
पुलिस स्मृति दिवस क्यों मनाया जाता है?
हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों को याद किया जाता है।
यह दिवस पुलिस बल के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। साथ ही यह समाज को याद दिलाता है कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी अनेक चुनौतियों का सामना करते हैं।
