Anmol Sandesh News Desk | भोपाल
जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर ने एक बार फिर देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में जबलपुर ने तीसरा स्थान हासिल किया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहले और मध्य प्रदेश का इंदौर दूसरे स्थान पर रहा। केंद्र सरकार के इस सर्वेक्षण में शहरों द्वारा वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ हवा के लिए किए जा रहे ठोस प्रयासों का आकलन किया जाता है। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में विजेता शहरों को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के बाद जबलपुर नगर निगम में भी उत्साह का माहौल है। शहर की स्वच्छ हवा के लिए किए जा रहे प्रयासों को इस रैंकिंग ने नई पहचान दी है।
कचरा प्रबंधन से लेकर सड़क की धूल तक पर फोकस
जबलपुर की बेहतर रैंकिंग के पीछे केवल एयर क्वालिटी का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर किए गए काम भी महत्वपूर्ण रहे। सर्वेक्षण में ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाली धूल, वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन में कमी जैसे मानकों को देखा गया। जबलपुर में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, घर-घर कचरा संग्रहण, मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे उपायों को बढ़ावा दिया गया है। शहर में स्थापित वेस्ट-टू-एनर्जी व्यवस्था भी स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है।
पिछले साल दूसरे स्थान पर था जबलपुर
जबलपुर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2025 के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर ने दूसरा स्थान हासिल किया था। उस समय इंदौर पहले नंबर पर था। 2026 में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर रहा। यानी रैंकिंग में एक पायदान नीचे आने के बावजूद जबलपुर देश के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बड़े शहरों में शामिल है। वहीं मध्य प्रदेश के दो शहरों का शीर्ष तीन में बने रहना राज्य के लिए भी बड़ी उपलब्धि है।

लखनऊ पहले, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की 2026 रैंकिंग में शीर्ष स्थानों पर तीन शहरों ने जगह बनाई—
- लखनऊ
2. इंदौर
3. जबलपुर
इसके बाद भोपाल और आगरा संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे, जबकि सूरत पांचवें स्थान पर रहा।
2025 में भी MP के शहरों का रहा दबदबा
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा है। 2025 में इंदौर ने 200 अंकों के साथ पहला और जबलपुर ने 199 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया था। उसी सर्वेक्षण में भोपाल भी छठे स्थान पर रहा था। इस बार भी इंदौर और जबलपुर का शीर्ष तीन में रहना बताता है कि प्रदेश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर असर दिखाई दे रहा है।
किन कामों से सुधरी हवा?
जबलपुर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया। इनमें कचरे का नियमित संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान, सड़क सफाई, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाना और स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहन जैसे उपाय शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहरों की रैंकिंग केवल किसी एक दिन के AQI पर आधारित नहीं होती। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों के प्रदूषण नियंत्रण उपायों और विभिन्न स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की दिशा में किए गए प्रयासों का व्यापक आकलन किया जाता है।
अब चुनौती तीसरे से पहले स्थान तक पहुंचने की
जबलपुर का तीसरे स्थान पर पहुंचना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब नगर प्रशासन के सामने इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है। अगले सर्वेक्षण में शहर को शीर्ष स्थान तक पहुंचाने के लिए सड़क की धूल, यातायात प्रदूषण, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन पर लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई जरूरी होगी।
