Monday, September 7, 2026
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यूपी में बिहार जैसा बूथ फॉर्मूला? बीजेपी ने शुरू की 2027 की तैयारी, विनोद तावड़े ने संगठन को दिया जीत का मंत्र, कमजोर बूथों पर विशेष फोकस और हर सामाजिक वर्ग तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति

Anmol Sandesh News Desk, लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े के लखनऊ दौरे के दौरान नेताओं और पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कमजोर बूथों की पहचान करने और हर सामाजिक वर्ग तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। पार्टी की रणनीति का एक अहम हिस्सा उन बूथों पर विशेष ध्यान देना है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। संगठन को ऐसे प्रत्येक बूथ की स्थिति का आकलन कर स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक अलग कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

हर बूथ का होगा अलग ‘प्लान’

बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ मैनेजमेंट को सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। पार्टी संगठन से जुड़े नेताओं को बूथवार कमजोरियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने पर काम करने को कहा गया है। खास तौर पर उन इलाकों पर नजर रहेगी जहां पार्टी का वोट प्रतिशत कमजोर रहा है। यहां स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, मतदाताओं से संपर्क मजबूत करने और संगठन की मौजूदगी को प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।

जातीय समीकरण साधने की चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक और जातीय समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। बीजेपी भी 2027 के चुनाव में किसी भी सामाजिक वर्ग या छोटे समूह को अपने संपर्क से बाहर नहीं रखने की रणनीति पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी की कोशिश है कि अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों के बीच संवाद बढ़ाया जाए। यही वजह है कि आने वाले समय में संगठन विस्तार और संभावित उम्मीदवारों के चयन में भी सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

सपा के PDA फॉर्मूले का मुकाबला

बीजेपी की रणनीति में समाजवादी पार्टी के PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण का मुकाबला करना भी अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व विपक्ष के सामाजिक समीकरणों के मुकाबले अपना व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रहा है। तावड़े ने सपा के PDA फॉर्मूले पर राजनीतिक हमला करते हुए इसे पराया धन अपना’ बताया है। इसके साथ ही बीजेपी जमीन पर कब्जे और महिला सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।

2022 में हारी सीटों पर खास नजर

2022 के विधानसभा चुनाव में जिन सीटों पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को हार मिली थी, अब उन क्षेत्रों की समीक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पार्टी इन सीटों पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हार के पीछे संगठनात्मक कमजोरी थी, स्थानीय समीकरण जिम्मेदार थे या उम्मीदवार और चुनावी रणनीति में बदलाव की जरूरत है। ऐसे क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

बिहार मॉडल से यूपी में क्या बदलेगा?

बिहार की चुनावी रणनीतियों में बूथ प्रबंधन, सामाजिक समीकरण और जमीनी संगठन को अहम भूमिका मिलने के बाद यूपी में भी इसी तरह की रणनीति अपनाने की चर्चा है। हालांकि दोनों राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए यूपी में पार्टी को स्थानीय समीकरणों के मुताबिक रणनीति में बदलाव करना होगा। बीजेपी के लिए 2027 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी विधानसभा वाला राज्य है और यहां का चुनाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालता है।

हैट्रिक के लिए संगठन पर दांव

बीजेपी की नजर यूपी में लगातार तीसरी बार विधानसभा में सत्ता हासिल करने पर है। इसके लिए पार्टी केवल बड़े नेताओं की सभाओं के बजाय बूथ स्तर के संगठन और स्थानीय सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। आने वाले महीनों में हारी हुई सीटों की समीक्षा, बूथवार रणनीति, सामाजिक संपर्क अभियान और संभावित उम्मीदवारों को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

 

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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