Anmol Sandesh News Desk,भोपाल
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे के विरोध में भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मुआज खान नुमानी नदवी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।उन्होंने सिर्फ निकाह काजी पद से ही नहीं, बल्कि दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे बोर्ड और संबंधित पदाधिकारियों को सौंप दिए हैं।

दो पदों से दिया इस्तीफा
मोहम्मद मुआज खान नुमानी नदवी ने अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए दो अलग-अलग पत्र भेजे।
- पहला इस्तीफा उन्होंने शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी को भेजा।
- दूसरा इस्तीफा दीनी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अबुल कलाम कासिमी को सौंपा।
इन पत्रों में उन्होंने वक्फ बोर्ड की मौजूदा गतिविधियों और फैसलों पर आपत्ति जताई है।
काजी मुआज खान ने क्या कहा?
अपने इस्तीफे में काजी मुआज खान ने लिखा कि उन्होंने उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड के वर्तमान पदाधिकारियों और जिम्मेदार लोगों का रवैया उन्हें स्वीकार नहीं है।उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संस्था से जुड़े रहना उनके लिए संभव नहीं है और उनका “इस्लामी आत्मसम्मान” उन्हें इस व्यवस्था में बने रहने की अनुमति नहीं देता।
गैर-मुस्लिम नियुक्तियों पर जताई आपत्ति
काजी मुआज खान का कहना है कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक और इस्लामी संस्था है। उनके अनुसार, ऐसी संस्था में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्होंने अपने पदों से हटने का फैसला लिया।
क्या है पूरा विवाद?
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। कुछ लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्था में गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए, जबकि दूसरी ओर वक्फ कानून और बोर्ड की संरचना को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।इसी विवाद के बीच काजी मुआज खान का इस्तीफा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।अब नजर इस बात पर है कि वक्फ बोर्ड इस इस्तीफे पर क्या प्रतिक्रिया देता है और गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
