Anmol Sandesh News Desk,रीवा
शासकीय गांधी स्मारक चिकित्सालय (GMH) में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें प्रसूता घबराई हुई हालत में अपने परिचित को बुलाते हुए मदद की गुहार लगाती नजर आ रही है। वीडियो में महिला कथित तौर पर कहती सुनाई दे रही है— ‘ऐ सानू इधर आओ… ये मार डालेंगे।’ घटना के बाद मृतका के परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। परिजन अस्पताल के मुख्य गेट पर बैठ गए और इलाज में कथित लापरवाही के खिलाफ विरोध जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।
25 अगस्त को प्रसव के लिए भर्ती हुई थीं कल्पना मिश्रा
जानकारी के अनुसार, मनगवां क्षेत्र निवासी कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए 25 अगस्त को गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान उन्हें अपेक्षित चिकित्सा सुविधा और समय पर उचित उपचार नहीं मिला। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान महिला की हालत बिगड़ती चली गई। 26 अगस्त की रात प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। एक साथ मां और बच्चे की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था, ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ के व्यवहार और इलाज में कथित देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।
‘दूसरे अस्पताल ले जाने’ की जिद कर रही थी महिला
घटना से संबंधित वायरल वीडियो ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। वीडियो में महिला बेहद घबराई हुई दिखाई दे रही है और अपने परिचित को पास बुलाने के लिए आवाज लगाती नजर आती है। परिजनों का दावा है कि महिला अस्पताल की परिस्थितियों से भयभीत थी और उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कह रही थी। वीडियो में महिला द्वारा कही गई बातों ने परिवार और स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। हालांकि, वीडियो की परिस्थितियों और उसमें कही गई बातों का पूरा संदर्भ जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतका के परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर इलाज में लापरवाही, अभद्र व्यवहार और समय पर उचित उपचार नहीं देने के आरोप लगाए हैं। परिवार की ओर से एनेस्थीसिया की मात्रा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं और कथित ओवरडोज की आशंका जताई गई है। हालांकि, एनेस्थीसिया की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं और महिला की मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या रहा, इसका स्पष्ट जवाब जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
अस्पताल के बाहर घंटों चला विरोध
जच्चा-बच्चा की मौत की जानकारी मिलने के बाद गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में परिजन अस्पताल के मुख्य गेट पर पहुंच गए। उन्होंने वहीं बैठकर विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों की प्रमुख मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। मामले की जानकारी मिलने पर मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति भी गांधी स्मारक अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच कई घंटे तक चर्चा हुई।
चार स्वास्थ्यकर्मी निलंबित
विरोध और गंभीर आरोपों के बीच मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई की। मामले में दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ड्यूटी चिकित्सक डॉ. सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा डॉ. निधि पांडेय, निश्चेतना विभाग से संबंधित कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही दो नर्सिंग अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है।
शव परीक्षण के बाद जांच आगे बढ़ी
परिजनों की मांग पर मृतका और नवजात बच्चे का संयुक्त टीम द्वारा शव परीक्षण कराया गया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय रिकॉर्ड जांच में अहम भूमिका निभाएंगे। मामले की जांच के लिए विभागाध्यक्षों की उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी महिला के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार, प्रसव की प्रक्रिया, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ की भूमिका तथा मौत से पहले की पूरी चिकित्सकीय स्थिति की जांच करेगी।
जांच रिपोर्ट से सामने आएगा मौत का असली कारण
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान मरीजों की निगरानी, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और अस्पताल स्टाफ के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मौत का वास्तविक कारण क्या था। क्या उपचार में देरी हुई? क्या किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई? क्या एनेस्थीसिया की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप थी? और क्या प्रसूता तथा नवजात को समय पर आवश्यक उपचार मिल पाया? इन सभी सवालों का अंतिम जवाब जांच रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर ही सामने आएगा। अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि जांच में यदि किसी डॉक्टर, नर्स या अन्य कर्मचारी की लापरवाही प्रमाणित होती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल चार स्वास्थ्यकर्मियों का निलंबन कर जांच शुरू कर दी गई है।
