Anmol Sandesh News Desk, बेंगलुरु
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने करीब 25 दिन पहले ही दोबारा मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले जून 2024 में भी उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बी. नागेंद्र का यह दूसरा इस्तीफा उसी विवाद से जुड़ा है, जो कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठा था। विपक्ष लंबे समय से नागेंद्र को मंत्री पद से हटाने की मांग कर रहा था। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच नागेंद्र ने इस्तीफे का फैसला किया। हालांकि, इस्तीफे का ऐलान करते समय नागेंद्र ने खुद को निर्दोष बताया और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार करार दिया।
इस्तीफे का ऐलान करते वक्त भावुक हुए नागेंद्र
मीडिया से बातचीत के दौरान बी. नागेंद्र भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों से पार्टी को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से उन्होंने अपनी इच्छा से मंत्री पद छोड़ने का फैसला लिया है। नागेंद्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष, खासकर BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग नहीं चाहते कि कोई आदिवासी नेता आगे बढ़े। उन्होंने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत रूप से लिया गया फैसला बताया और कहा कि वह जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
25 दिन पहले ही बने थे फिर मंत्री
बी. नागेंद्र का दोबारा मंत्री बनना भी राजनीतिक रूप से चर्चा में रहा था। कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलों और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बीच उन्हें दोबारा सरकार में जगह मिली थी। लेकिन मंत्री पद संभालने के कुछ ही समय बाद वाल्मीकि निगम से जुड़ा पुराना विवाद फिर से सामने आ गया। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए नागेंद्र की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए और लगातार उनके इस्तीफे की मांग की। लगातार बढ़ते दबाव के बीच अब नागेंद्र ने मंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है।
2024 में भी देना पड़ा था इस्तीफा
बी. नागेंद्र के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देने का यह पहला मौका नहीं है। जून 2024 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उस समय भी वाल्मीकि निगम से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। मामले में राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद नागेंद्र ने मंत्री पद छोड़ दिया था। इसके बाद कर्नाटक की राजनीति में बदलाव और सरकार में नए समीकरणों के बीच उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। लेकिन दोबारा मंत्री बनने के बाद भी पुराना विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ सका।
क्या है वाल्मीकि निगम से जुड़ा विवाद?
पूरा मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि निगम के बैंक खाते से करीब 187 करोड़ रुपये की राशि कथित तौर पर बिना उचित अनुमति के ट्रांसफर की गई। इस मामले में कई स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब निगम के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखर पी. ने आत्महत्या कर ली। उनके पास से मिले सुसाइड नोट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया और विपक्ष ने तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।
इस्तीफे के बाद जांच ने पकड़ा जोर
निगम में कथित वित्तीय गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि निगम के पैसे का ट्रांसफर किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी धन के इस्तेमाल में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ। बी. नागेंद्र ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लगातार खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें इस मामले में राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया गया। यानी एक तरफ जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती भी खड़ी कर दी है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि इतने गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले में सरकार को पहले ही सख्त कदम उठाना चाहिए था। विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा कि जिस मामले के कारण 2024 में मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, उसी विवाद के बावजूद उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया गया। अब नागेंद्र के दोबारा इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस सरकार की कार्यशैली और मंत्रिमंडल में उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
एक ही विवाद ने दो बार छीना मंत्री पद
बी. नागेंद्र के राजनीतिक सफर में यह घटनाक्रम बेहद असामान्य है। दो साल के भीतर एक ही विवाद से जुड़े मामले में उन्हें दो बार मंत्री पद छोड़ना पड़ा है। पहली बार 2024 में इस्तीफा, फिर दोबारा मंत्री पद और अब एक बार फिर इस्तीफा—इस पूरे घटनाक्रम ने कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम मामले को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में आगे क्या सामने आता है और क्या बी. नागेंद्र के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते हैं। फिलहाल नागेंद्र अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर रहे हैं और खुद को निर्दोष बता रहे हैं।
