Saturday, August 29, 2026
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बैगा बाहुल्य बोंदारी पहुंचे CM मोहन यादव, मलेरिया प्रभावित परिवारों से मिले; बच्चों की मौत के बाद गांव में बढ़ी चिंता

Anmol Sandesh News Desk, बालाघाट

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा बाहुल्य इलाके में स्वास्थ्य संकट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मलेरिया, मीजल्स संक्रमण और पोषण से जुड़ी समस्याओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को जिले के बैगा बाहुल्य ग्राम बोंदारी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां बीमारी से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बताया जा रहा है कि अडोरी, घुम्मुर और मछूरदा पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 11 से अधिक गांव बीमारी की चपेट में हैं। स्थानीय स्तर पर अब तक 10 बच्चों की मौत होने की बात सामने आई है। इन घटनाओं के बाद आदिवासी बैगा समुदाय में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नाराजगी बढ़ गई है।

पीड़ित परिवारों से सीधे मिले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोंदारी पहुंचकर बीमारी और कुपोषण से जूझ रहे परिवारों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से स्वास्थ्य सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, बच्चों के इलाज और स्थानीय समस्याओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री के गांव में करीब एक घंटे रुकने का कार्यक्रम बताया गया है। इस दौरान अधिकारियों से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और बीमारी की स्थिति की जानकारी भी ली जा रही है। मुख्यमंत्री का दौरा ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में बच्चों की मौत की खबरों के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।

11 से ज्यादा गांवों में बीमारी का असर

स्थानीय जानकारी के मुताबिक अडोरी, घुम्मुर और मछूरदा पंचायतों से जुड़े कई गांवों में मलेरिया और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवारों में बच्चों और अन्य सदस्यों की तबीयत लगातार खराब हो रही है। बीमारी के साथ-साथ पोषण की समस्या भी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी चुनौती बनी हुई है। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूर-दराज के गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी प्रशासन के लिए चुनौती माना जाता है।

बच्चों की मौत से परिवारों में दहशत

बीमारी से अब तक 10 बच्चों की मौत होने की जानकारी ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। हालांकि मौतों के वास्तविक कारण और प्रत्येक मामले में बीमारी की भूमिका की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई परिवार आर्थिक और भौगोलिक कारणों से समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में गांवों में ही जांच, दवा और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने की मांग लगातार उठ रही है।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि बैगा बहुल इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों को नियमित रूप से गांव-गांव जाकर जांच और जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि उनके गांव में लंबे समय से मलेरिया की दवाओं का पर्याप्त वितरण नहीं हुआ। हालांकि इन दावों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

आंगनवाड़ी और पोषण व्यवस्था पर भी सवाल

क्षेत्र में केवल बीमारी ही नहीं बल्कि कुपोषण और पोषण व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। ऐसे इलाकों में बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, पोषण आहार की गुणवत्ता और टीकाकरण व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया जैसी बीमारी और कुपोषण एक-दूसरे की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं, इसलिए बीमारी के साथ पोषण पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।

पानी की समस्या भी बनी चुनौती

ग्रामीणों के मुताबिक कई क्षेत्रों में अब तक पाइपलाइन की सुविधा पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता और स्वच्छता की कमी भी ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ पेयजल, स्वच्छता और पोषण से जुड़ी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाए।

लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण

बालाघाट के बिरसा, बैहर और जिला मुख्यालय सहित कई स्थानों पर पिछले दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन और धरने की खबरें सामने आई हैं। ग्रामीण और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगों में अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति, पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ, दवाओं की नियमित उपलब्धता, गांव-गांव स्वास्थ्य जांच, बेहतर पोषण व्यवस्था और प्रभावित परिवारों को उचित सहायता शामिल हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की मांग भी की है।

नक्सलमुक्ति के बाद CM का पहला दौरा

मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह दौरा एक और वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बालाघाट क्षेत्र को नक्सल गतिविधियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री का इस क्षेत्र में यह पहला दौरा बताया जा रहा है।ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के दौरे के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

अब सरकार की अगली चुनौती

मुख्यमंत्री के दौरे के बाद सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के वास्तविक कारणों की पहचान, प्रभावित गांवों की सटीक स्थिति का आकलन और समय पर इलाज उपलब्ध कराना होगी। प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रभावित गांवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगें, मलेरिया की जांच और उपचार उपलब्ध हो, बच्चों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाए और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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