Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित मंच ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की मांग की। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने इसे दलितों के प्रति भेदभाव और सामाजिक बराबरी के सवाल से जोड़ते हुए कहा कि देश में आज दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ भारत का संविधान है, जिसे वह डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की विचारधारा से जोड़ते हैं, जबकि दूसरी तरफ BJP और RSS की विचारधारा है।
‘दलितों पर सदियों से होता रहा अत्याचार’
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश में दलितों के साथ ऐतिहासिक भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संविधान ने छुआछूत और भेदभाव को गैरकानूनी बनाया है, लेकिन इसके बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाएं आज भी सामने आती हैं। उन्होंने स्कूलों में दलित बच्चों के साथ कथित भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर बच्चों से टॉयलेट साफ करवाने या झाड़ू-पोछा करवाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं। राहुल ने सवाल उठाया कि इस तरह के व्यवहार का बच्चों के मानसिक विकास और आने वाली पीढ़ियों पर क्या असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, सामाजिक बराबरी सिर्फ कानून बनाने से हासिल नहीं होगी, बल्कि समाज की सोच और व्यवहार में भी बदलाव जरूरी है।
गांवों के कुओं और चाय की दुकानों का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने ग्रामीण क्षेत्रों में कथित सामाजिक भेदभाव के उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ जगहों पर दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी लेने से रोकने जैसी घटनाएं अभी भी देखने को मिलती हैं। उन्होंने चाय की दुकानों में अलग-अलग तरह के कप इस्तेमाल किए जाने का दावा भी किया। राहुल के मुताबिक, कुछ स्थानों पर कथित तौर पर दलितों के लिए अलग कप रखे जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में सामाजिक भेदभाव की समस्या अब भी मौजूद है। राहुल ने कहा कि इस तरह के व्यवहार के खिलाफ संविधान और कानून की भावना को मजबूत करने की जरूरत है।
खड़गे को लेकर राहुल ने उठाया सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी कार्यक्रम का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि खड़गे ने अपना पूरा राजनीतिक जीवन देश और संविधान को समर्पित किया है। उनके मुताबिक, खड़गे के भाषण के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ की खबर सामने आना बेहद गंभीर है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर मंच को शुद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने इसे दलितों की गरिमा और समानता से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने अध्यक्ष के लिए न्याय चाहती है। हालांकि, मंच-शुद्धिकरण को लेकर सामने आए दावों और उसके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का पक्ष इस विवाद में महत्वपूर्ण है।
‘ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई होनी चाहिए’
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस तरह की घटनाओं पर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के कारण भेदभाव किया जाता है तो यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में सामाजिक बराबरी को लेकर वैचारिक संघर्ष चल रहा है। राहुल के मुताबिक कांग्रेस संविधान और समानता के सिद्धांतों के पक्ष में खड़ी है।
राजस्थान की घटना का भी किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने राजस्थान का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के एक CLP नेता के मंदिर जाने के बाद BJP नेताओं द्वारा ‘शुद्धिकरण’ की रस्म किए जाने की बात सामने आई। राहुल ने इन घटनाओं को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि ऐसी परंपराएं और व्यवहार आज के भारत में कैसे स्वीकार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है और किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
12 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने अपने आगामी कार्यक्रम की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह 12 सितंबर को मध्यप्रदेश के इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दिए जाने की उम्मीद है। राहुल गांधी का फोकस शिक्षा, रोजगार, युवाओं की भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर रह सकता है।
बयान के बाद फिर गरमाई सियासत
हल्द्वानी का कथित मंच-शुद्धिकरण विवाद अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इसे सामाजिक भेदभाव और संविधान की मूल भावना से जोड़ रही है, जबकि इस तरह के आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि भी जरूरी है।राहुल गांधी के तीखे बयान के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
