Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
राजधानी भोपाल में आयोजित नाट्य संध्या में सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित दो प्रभावशाली नाटकों ‘रीढ़ की हड्डी’ और ‘आखिरी बस’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया। अंतरंग कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी, भोपाल द्वारा जवाहर बाल भवन, तुलसी नगर में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रंगकर्मी और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार जगदीश चंद्र माथुर के चर्चित नाटक ‘रीढ़ की हड्डी’ से हुई। निर्देशक सीमा मोरे के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दहेज प्रथा, सामाजिक दिखावे और विवाह व्यवस्था में महिलाओं की स्थिति जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।
कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और संवेदनशील प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर सवाल खड़े करते हुए दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। नाटक का सह-निर्देशन संघमित्रा बनकर ने किया।
‘आखिरी बस’ ने रिश्तों की संवेदनाओं को किया जीवंत
नाट्य संध्या की दूसरी प्रस्तुति ‘आखिरी बस’ रही, जिसने मानवीय रिश्तों, भावनाओं और बदलते सामाजिक परिवेश की मार्मिक कहानी को मंच पर जीवंत किया। निर्देशक संतोष सुमन के निर्देशन में कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से पात्रों को साकार कर दिया।नाटक की भावनात्मक कथा और संवेदनशील प्रस्तुति ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुति के माध्यम से रिश्तों के महत्व, मानवीय मूल्यों और सामाजिक जुड़ाव का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया।
कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों एवं वरिष्ठ रंगकर्मियों ने दोनों नाटकों की सराहना करते हुए कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त साधन भी है।उन्होंने कलाकारों और आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां सामाजिक चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

भविष्य में भी जारी रहेगा सामाजिक विषयों पर मंचन
अंतरंग कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था भविष्य में भी सामाजिक सरोकारों, जन-जागरण और मानवीय मूल्यों से जुड़े नाटकों का मंचन करती रहेगी।कार्यक्रम के अंत में कलाकारों, तकनीकी सहयोगियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित दर्शकों ने दोनों प्रस्तुतियों को विचारोत्तेजक, मनोरंजक और सामाजिक संदेशों से भरपूर बताते हुए कलाकारों के अभिनय की मुक्त कंठ से सराहना की।नाट्य संध्या ने एक बार फिर साबित किया कि रंगमंच समाज का आईना है, जो मनोरंजन के साथ-साथ सोचने और बदलाव की प्रेरणा भी देता है।
