Tuesday, September 15, 2026
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Ganesh Chaturthi 2026: छत्तीसगढ़ का रहस्यमयी ‘भूमिफोड़’ गणेश मंदिर, मान्यता-100 साल से बढ़ रहा है बप्पा का स्वरूप

Anmol Sandesh News Desk, बालोद, छत्तीसगढ़

देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। घरों से लेकर शहरों के चौक-चौराहों तक गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के बालोद का करीब 100 साल पुराना एक गणेश मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं को लेकर चर्चा में है। बालोद के मरारापारा (गणेश वार्ड) स्थित इस मंदिर को स्थानीय लोग भूमिफोड़ गणेश मंदिर’ के नाम से जानते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा जमीन से स्वयं प्रकट हुई थी और समय के साथ इसका स्वरूप लगातार बढ़ता जा रहा है।

जमीन से प्रकट हुए थे गणेश जी?

स्थानीय मान्यता के अनुसार, करीब 100 वर्ष पहले जमीन के भीतर से भगवान गणेश की प्रतिमा दिखाई दी थी। बताया जाता है कि सबसे पहले स्वर्गीय सुल्तानमल बाफना और भोमराज श्रीमाल की नजर इस प्रतिमा पर पड़ी थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के आसपास मंदिर का निर्माण कराया। शुरुआत में यहां एक छोटा-सा टीनशेड था, लेकिन समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और मंदिर का भी विस्तार होता गया।

हर साल बढ़ता है बप्पा का स्वरूप!

इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प मान्यता भगवान गणेश की प्रतिमा के आकार को लेकर है। श्रद्धालुओं का दावा है कि बप्पा का स्वरूप धीरे-धीरे बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब प्रतिमा का आकार बढ़ता है तो गर्भगृह के फर्श पर दरारें भी दिखाई देने लगती हैं। मान्यता है कि गणेश प्रतिमा का कुछ हिस्सा आज भी जमीन के अंदर मौजूद है। हालांकि, प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है, इसकी कोई प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

100 साल में बदल गया मंदिर का स्वरूप

बताया जाता है कि जब यह प्रतिमा प्रकट हुई थी, तब यहां बेहद छोटा मंदिर बनाया गया था। धीरे-धीरे आसपास के लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और मंदिर का विकास होता गया। आज यह स्थान स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

संतान प्राप्ति की भी है मान्यता

बालोद के इस मंदिर से जुड़ी एक और बड़ी मान्यता संतान प्राप्ति को लेकर है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि संतान की इच्छा रखने वाले भक्त अगर सच्चे मन से बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं तो उनकी मनोकामना पूरी होती है। मान्यता पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश का आभार व्यक्त करते हैं और दान-पुण्य करते हैं।

आस्था और रहस्य का अनोखा संगम

बालोद का यह ‘भूमिफोड़ गणेश मंदिर’ जहां एक ओर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़ी मान्यताएं इसे बेहद रहस्यमयी भी बनाती हैं। प्रतिमा के लगातार बढ़ने और जमीन के भीतर इसके विस्तार को लेकर स्थानीय लोगों में आज भी खास उत्सुकता बनी हुई है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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