Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
देश में एथेनॉल मिले पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने एथेनॉल नीति पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस योजना से उन्हें कोई निजी फायदा नहीं हो रहा, बल्कि इसका लाभ किसानों, देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को मिल रहा है।गडकरी ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों के लिए आय के नए रास्ते तैयार करना है।

एथेनॉल पर क्यों छिड़ी बहस?
पिछले कुछ समय से कई वाहन मालिकों ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों का दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल से वाहन के इंजन पर असर पड़ा और माइलेज कम हुआ।वहीं, कुछ आलोचकों ने एथेनॉल नीति को लेकर सरकार पर सवाल भी उठाए। इन आरोपों पर जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि एथेनॉल के कारण वाहन खराब होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है।उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास इस संबंध में प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर चर्चा हो सके।
1.5% से 20% तक पहुंचा एथेनॉल मिश्रण
नितिन गडकरी ने बताया कि साल 2014 में भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण केवल करीब 1.5 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच चुका है।
उनके मुताबिक, इस नीति से:
* कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई
* विदेशी मुद्रा की बचत हुई
* किसानों के लिए नई बाजार संभावनाएं बनीं
* प्रदूषण कम करने में मदद मिली
गडकरी ने दावा किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण देश को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत हुई है।
किसानों को कैसे मिला फायदा?
गडकरी ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ी है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिला।उन्होंने दावा किया कि इस पहल के माध्यम से करीब 45 हजार करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
भारत का तेल आयात बिल घटाने पर जोर
भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे देश का बड़ा विदेशी मुद्रा खर्च होता है। गडकरी ने कहा कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देकर भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार एथेनॉल के साथ-साथ:
- बायोफ्यूल
- ग्रीन हाइड्रोजन
- स्वच्छ ऊर्जा तकनीक
को भी बढ़ावा दे रही है।
क्या एथेनॉल से वाहन खराब होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन का असर वाहन के मॉडल, इंजन की क्षमता और फ्यूल सिस्टम की अनुकूलता पर निर्भर कर सकता है। नए वाहन अधिक एथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं, जबकि पुराने वाहनों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।एथेनॉल नीति को लेकर देश में बहस जारी है। सरकार इसे किसानों की आय बढ़ाने और तेल आयात कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि वाहन मालिकों की चिंताओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। आने वाले समय में एथेनॉल आधारित ईंधन भारत की ऊर्जा नीति में कितनी बड़ी भूमिका निभाएगा, यह देखने वाली बात होगी।
