Anmol Sandesh News Desk, मुंबई
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को IIMUN के 15वें वार्षिक सम्मेलन में Gen-Z और Gen-Alpha छात्रों से खुलकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं, शिक्षा व्यवस्था, लोकतंत्र और विरोध-प्रदर्शन को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उनके बयान अब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
“Gen-Z पर मुझे पूरा भरोसा है”
मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें आज की युवा पीढ़ी पर पूरा विश्वास है। उनके मुताबिक, अगर Gen-Z किसी मुद्दे पर विरोध कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह देश विरोधी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पहले की तुलना में ज्यादा ईमानदार, जागरूक और सवाल पूछने वाली है।
“आंदोलन लोकतंत्र में संवाद का माध्यम है”
RSS प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन संवाद स्थापित करने का एक वैध तरीका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कहेंगे कि युवाओं को आंदोलन नहीं करना चाहिए, बल्कि कैसे आंदोलन किया जाए, यह अधिक महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा,“अगर Gen-Z आवाज उठा रही है तो सिर्फ विरोध के लिए नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें किसी जरूरी मुद्दे की चिंता है।”
NEET आंदोलन का भी किया जिक्र
हाल के NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने माना कि किसी घटना पर पूरी जानकारी के बिना सही-गलत का फैसला नहीं किया जा सकता, लेकिन युवाओं की बात को नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए।
“अब युवा सिर्फ मानते नहीं, सवाल भी पूछते हैं”
मोहन भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ियां बड़ों की बात बिना सवाल किए मान लेती थीं, लेकिन आज की Gen-Z हर विषय पर सवाल पूछती है। उनके अनुसार यह लोकतंत्र और समाज के लिए सकारात्मक बदलाव है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है। शिक्षा को व्यापार नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचनी चाहिए और शिक्षकों की बेहतर ट्रेनिंग भी जरूरी है।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं पर चिंता
जब उनसे स्कूलों में शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जहां ऐसी कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। खासकर बेटियों की शिक्षा के लिए सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं बेहद जरूरी हैं।मोहन भागवत के इन बयानों ने लोकतंत्र, शिक्षा और युवाओं की भूमिका को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके विचारों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
