Tuesday, October 13, 2026
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ब्लूमबर्ग फोरम में PM मोदी का विकास मंत्र: तकनीक का असली लक्ष्य लाखों लोगों को सशक्त बनाना

Anmol Sandesh News Desk | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में तकनीक, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन के जरिए समावेशी विकास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उस ताकत का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाए, उनकी क्षमताओं को बढ़ाए और लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा करे। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विकास की ऐसी सोच पर जोर दिया, जिसमें नागरिकों को केवल सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जाए। उनके संबोधन में डिजिटल तकनीक, गरीबी उन्मूलन, लोकतंत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

तकनीक और डेटा का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार विकास के महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इन संसाधनों का लाभ केवल कुछ लोगों या संस्थानों तक सीमित न रहे।

उन्होंने लोगों को सशक्त बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए होना चाहिए, जिसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें। ज्ञान का उद्देश्य भी केवल कुछ लोगों की प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे समाज के व्यापक वर्ग की क्षमताओं में वृद्धि होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस संदेश का मुख्य विचार यही रहा कि विकास का मूल्यांकन केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जाना चाहिए कि उस प्रगति से आम लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।

25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भारत में गरीबी कम करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास अधिकार और संसाधन होने का उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत बनाना होना चाहिए। जब लोगों को बेहतर अवसर, सुविधाएं और अपनी क्षमता विकसित करने के साधन मिलते हैं, तो वे अपने जीवन में बदलाव लाने में अधिक सक्षम होते हैं।

प्रधानमंत्री ने इसी सोच को विकास की दिशा के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें सरकारी प्रयासों का केंद्र नागरिकों का सशक्तीकरण और उनकी आर्थिक-सामाजिक क्षमताओं को बढ़ाना है।

भारत को बताया लोकतंत्र की जननी

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और विविधता का उल्लेख करते हुए देश को लोकतंत्र की जननी बताया। उन्होंने कहा कि भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं और विभिन्न विचारों को व्यक्त करने की परंपरा रही है।

अपने संबोधन में उन्होंने देश के मीडिया और डिजिटल मंचों की व्यापकता का भी जिक्र किया। उन्होंने 100 से अधिक भाषाओं, लगभग 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्रों और प्रकाशनों तथा एक हजार से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनलों का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों पर भारत के बड़े उपयोगकर्ता आधार की ओर ध्यान दिलाया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में अलग-अलग मुद्दों पर बहस और विभिन्न दृष्टिकोणों पर चर्चा लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा हैं। डिजिटल तकनीक ने इस संवाद को नए मंच उपलब्ध कराए हैं, जिससे लोगों के विचारों के आदान-प्रदान के अवसर बढ़े हैं।

AI का इस्तेमाल मानवता के साथ पशुओं के हित में भी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट का उल्लेख किया। उन्होंने तकनीक को मानवता के हित में इस्तेमाल करने और उसके लाभों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने यह विचार भी सामने रखा कि AI जैसी आधुनिक तकनीक से केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि पशुओं के कल्याण में भी सहायता मिल सकती है। तकनीक का इस्तेमाल समस्याओं के समाधान, बेहतर सेवाओं और नए अवसरों के निर्माण में किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के संदेश के अनुसार, भारत की तकनीकी क्षमताओं में होने वाली वृद्धि का लाभ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग वैश्विक चुनौतियों से निपटने और पूरी मानवता के कल्याण में योगदान देने के लिए भी किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन पर भारत की उपलब्धि का जिक्र

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में हासिल उपलब्धि की बात कही।

भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत वर्ष 2030 तक अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, देश ने नवंबर 2021 में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया था। उस समय गैर-जीवाश्म ऊर्जा आधारित स्थापित बिजली क्षमता कुल क्षमता का लगभग 40.1 प्रतिशत हो गई थी।

इस उदाहरण के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में भारत की प्रगति को रेखांकित किया गया। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और दीर्घकालिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय परंपरा में निहित है विकास का विचार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का महत्व इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है। किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार के पास उपलब्ध संसाधन तभी सार्थक होते हैं, जब उनका इस्तेमाल लोगों के कल्याण और समाज की प्रगति के लिए किया जाए। उन्होंने भारत की हजारों वर्ष पुरानी परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि सामूहिक कल्याण और दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच भारतीय विचारधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसी संदर्भ में उनका संदेश था कि आधुनिक तकनीक और प्राचीन भारतीय मूल्यों के बीच समन्वय स्थापित करके विकास को अधिक व्यापक और समावेशी बनाया जा सकता है।

पहली बार भारत में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आठवां संस्करण 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। ब्लूमबर्ग मीडिया की घोषणा के अनुसार, इस आयोजन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के 500 से अधिक वैश्विक नेताओं के शामिल होने की योजना है। फोरम का विषय “A World in Play: Defining the New Levers of Power” रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में पहली बार इस आयोजन की मेजबानी होने पर ब्लूमबर्ग और उसकी टीम को बधाई दी। यह मंच वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी बदलाव, नेतृत्व और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान कर रहा है।

विकास की दिशा में सशक्त नागरिकों पर जोर

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन तकनीकी प्रगति के साथ नागरिकों के सशक्तीकरण को जोड़ने पर केंद्रित रहा। उन्होंने तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने, लोकतांत्रिक संवाद को महत्व देने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उनके संदेश का केंद्रीय विचार यह रहा कि विकास केवल संसाधनों और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका उद्देश्य लोगों को अधिक सक्षम बनाना, नए अवसर उपलब्ध कराना और प्रगति के लाभों को व्यापक समाज तक पहुंचाना भी होना चाहिए।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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