Anmol Sandesh News Desk,इस्लामाबाद
Bahawalpur Jaish-e-Mohammed: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े परिसर को भारी नुकसान पहुंचने के बाद अब उसके दोबारा तैयार किए जाने का दावा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 15 महीने बाद परिसर के क्षतिग्रस्त हिस्सों का चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्माण किया गया है।
तबाह परिसर में फिर से निर्माण
दावे के अनुसार, हमले में क्षतिग्रस्त हुए गुंबदों को दोबारा बनाया गया है। परिसर में नया संगमरमर, प्लास्टर और पेंट लगाकर इमारत को नया रूप दिया गया है। बताया जा रहा है कि मरम्मत का काम एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग चरणों में लंबे समय तक चलता रहा।परिसर में मदरसा अल-सबीर और जैश के कमांडरों के रहने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हिस्सों के भी पुनर्निर्माण का दावा किया गया है।

25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की मदद का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परिसर की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए करीब 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च किए गए। हालांकि, इस रकम और इसके स्रोत को लेकर सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर से क्या है कनेक्शन?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सैन्य कार्रवाई में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद का परिसर भी इसी कार्रवाई से जुड़ा बताया गया था।

फिर क्यों चर्चा में है बहावलपुर कैंप?
बहावलपुर लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियों से जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में यदि क्षतिग्रस्त परिसर का दोबारा निर्माण हुआ है, तो यह आतंकी नेटवर्क के ढांचे और उसकी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम सवाल खड़े करता है।हालांकि, परिसर के पुनर्निर्माण, 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की फंडिंग और वर्तमान गतिविधियों से जुड़े दावों को स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि के साथ देखना जरूरी है।
बड़ा सवाल
ऑपरेशन सिंदूर में तबाही के बाद अगर आतंकी ढांचे को फिर खड़ा किया जा रहा है, तो क्या यह पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई और निगरानी को लेकर नए सवाल नहीं खड़े करता?
