Anmol Sandesh News Desk, मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UBT) के भीतर संभावित टूट की चर्चा ने सियासी माहौल गरमा दिया है। जून में उद्धव ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद अब 14 विधायकों के संभावित पाला बदलने की चर्चा सामने आई है। हालांकि, विधायकों के पाला बदलने की बात फिलहाल राजनीतिक दावा और अटकल है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
छह सांसदों के बाद अब विधायकों पर नजर
22 जून 2026 को शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसद—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटील अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर—शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए थे। इस घटनाक्रम को एकनाथ शिंदे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता बताया था। इसके बाद उद्धव गुट की लोकसभा में संख्या घटकर तीन रह गई।
14 विधायक टूटे तो क्या होगा?
शिवसेना (UBT) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में करीब 20 विधायक हैं। शिंदे खेमे से जुड़े नेताओं की ओर से दावा किया गया है कि इनमें से 14 विधायक उनके संपर्क में हैं। यदि वास्तव में 14 विधायक एक साथ पाला बदलते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बेहद बड़ा राजनीतिक झटका होगा। साथ ही, दल-बदल कानून के तहत दो-तिहाई संख्या का आंकड़ा भी इस चर्चा को महत्वपूर्ण बनाता है।
2022 की बगावत की यादें फिर ताजा
मौजूदा घटनाक्रम ने 2022 की उस बड़ी राजनीतिक बगावत की यादें ताजा कर दी हैं, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के बड़ी संख्या में विधायक उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। अब चार साल बाद सांसदों के बाद विधायकों को लेकर चल रही चर्चाओं ने ठाकरे गुट की चिंता बढ़ा दी है।
उद्धव खेमे की रणनीति पर नजर
छह सांसदों के टूटने के बाद उद्धव ठाकरे ने पार्टी विधायकों की अहम बैठक बुलाई थी। पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा विधायकों को एकजुट रखने की है। दूसरी ओर, शिंदे खेमे के नेताओं के बयानों ने इस राजनीतिक मुकाबले को और तेज कर दिया है। जून में शिंदे खेमे की ओर से यह संकेत भी दिए गए थे कि सांसदों के बाद अगला निशाना विधायक और स्थानीय निकायों के नेता हो सकते हैं।
असली तस्वीर क्या है?
फिलहाल 14 विधायकों के शिंदे गुट में जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। अगर यह दावा वास्तविक पाला-बदल में बदलता है, तो महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच शक्ति संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
