Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 में 30 सितंबर 2026 को हुई गंभीर घटना के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल पर पूरी आपबीती साझा की। अबू धाबी के अस्पताल से हुई करीब 10 मिनट की बातचीत में स्मित ने बताया कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्हें लगातार महसूस हो रहा था कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है। इसी दौरान उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की आखिरी कोशिश की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के अन्य सदस्यों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला। विमान में कुल 174 लोग सवार थे और घटना के दौरान विमान करीब 14,000 फीट नीचे गिरा। बाद में यात्रियों और क्रू की मदद से स्थिति पर काबू पाया गया और विमान को सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना की परिस्थितियों और हमले के मकसद की जांच जारी है।
पीएम मोदी ने कहा- पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा है
वीडियो कॉल की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्मित की तबीयत के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा है और उनकी हिम्मत, धैर्य और सूझबूझ ने संकट के बीच कई लोगों की जान बचाने में मदद की। मोदी ने यह भी कहा कि स्मित ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद यात्रियों के जीवन को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान स्मित के परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह पहले उनके पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनल बहन से बात कर चुके हैं और उनके साहस की सराहना की।
स्मित बोले- मुझे पता था विमान नीचे जा रहा है
कैप्टन स्मित ने पीएम मोदी को घटना का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए बताया कि हमले के बाद वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गए थे। इसके बावजूद उन्हें विमान की स्थिति का एहसास हो रहा था। स्मित ने कहा कि वह करीब 17 साल से विमान उड़ा रहे हैं और पिछले 11 साल से कैप्टन हैं। उनके मुताबिक, इसी अनुभव के कारण उन्हें पता था कि विमान नीचे जा रहा है और अब कुछ ही क्षणों में निर्णायक कदम उठाना होगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद से कहा कि अगर वह नहीं उठे तो यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया।
“मैं उन सबको मरने नहीं दे सकता था”
बातचीत के दौरान स्मित ने कहा कि उस वक्त वह अपनी जिंदगी के लिए भी लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें यह भी पता था कि विमान में मौजूद बाकी लोगों को बचाने के लिए उन्हें कुछ करना होगा। उनके अनुसार, दरवाजा खुलने के बाद यात्री और अन्य लोग कॉकपिट में पहुंचे और हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद दूसरे पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला।
दर्द के बीच हनुमान चालीसा का पाठ
कैप्टन स्मित ने पीएम मोदी से बातचीत में बताया कि जब भी उन्हें दर्द या मुश्किल महसूस होती है, वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। घटना के दौरान भी उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भगवान ने ही उनकी जान बचाई। स्मित ने यह भी बताया कि वह रोज सुबह पूजा करते हैं और उनका दो साल का बेटा भी उनके साथ हनुमान चालीसा सुनता है। उन्होंने कहा कि विदेश में रहते हुए भी उनकी कोशिश रहती है कि वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
पीएम मोदी से बात करते हुए भावुक हुए स्मित
बातचीत का एक भावुक क्षण तब आया जब कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह उनके सबसे बड़े आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि पीएम का फोन आना उनके लिए बेहद गर्व की बात है और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री से उनकी इस तरह बातचीत होगी। स्मित भावुक होकर रोने लगे तो पीएम मोदी ने उनसे कहा कि अगर वह उनके सामने भावुक नहीं होंगे तो फिर कहां होंगे। मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पूरा देश उनके साथ है और जरूरत पड़ने पर वह उनसे संपर्क के लिए उपलब्ध हैं।
पीएम मोदी ने परिवार और इलाज का भी जिक्र किया
प्रधानमंत्री ने स्मित की मां गीताबेन, पिता भूपेंद्रभाई और पत्नी सोनल बहन की हिम्मत की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थिति के बावजूद परिवार ने संयम बनाए रखा। मोदी ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों का भी इलाज और देखभाल के लिए आभार जताया। बातचीत के अंत में उन्होंने स्मित के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि भारत उनके लौटने का इंतजार कर रहा है।
अस्पताल में उपचार, हालत स्थिर
हमले के बाद कैप्टन स्मित का इलाज कराया गया और बाद में उन्हें अबू धाबी ले जाया गया, जहां वह अस्पताल में भर्ती हैं। Reuters के अनुसार, वीडियो कॉल के दौरान उनके सिर और हाथों पर पट्टियां थीं और वह अस्पताल के बिस्तर से पीएम मोदी से बात कर रहे थे।
पीएम मोदी पहले भी कर चुके हैं तारीफ
प्रधानमंत्री मोदी ने 1 अक्टूबर को भी कैप्टन स्मित के साहस की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। PIB के अनुसार, मोदी ने कहा था कि गंभीर खतरे और चोट के बावजूद स्मित ने दूसरों की जान बचाने के लिए अदम्य साहस दिखाया और उनकी कार्रवाई से बड़ी त्रासदी टलने में मदद मिली। UPSC के शताब्दी समारोह में भी प्रधानमंत्री ने स्मित के साहस का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना स्थिति का सामना किया।

नेतन्याहू और ट्रंप ने भी की थी सराहना
घटना के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा था कि उनकी कार्रवाई से 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली। नेतन्याहू ने उन्हें “ट्रू हीरो” कहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्मित को “हीरो” बताया और संकट के दौरान उनकी सूझबूझ की सराहना की।
स्पाइसजेट में 11 साल से ज्यादा किया काम
कैप्टन स्मित मच्छर का एविएशन करियर भी लंबा रहा है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्पाइसजेट में 11 साल से अधिक समय काम किया और 9,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया। जून 2022 में उन्होंने फ्लाईदुबई जॉइन की और वहां बोइंग 737 विमान के कैप्टन के रूप में सेवाएं दीं। उनके इसी लंबे उड़ान अनुभव का जिक्र उन्होंने पीएम मोदी से बातचीत में भी किया और बताया कि 17 साल से विमान उड़ाने के कारण उन्हें विमान की स्थिति का तुरंत अंदाजा हो गया था।
गुजरात सरकार देगी ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’
कैप्टन स्मित की बहादुरी को देखते हुए गुजरात सरकार ने उन्हें ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इस पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की नकद राशि भी दी जाएगी। सम्मान समारोह उनके स्वस्थ होने के बाद आयोजित किया जाएगा।
