Anmol Sandesh News Desk,सागर
मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। अब एसपी और कलेक्टर के स्तर पर भी कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों को हटाए जाने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले सरकार मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई कर चुकी है और बंडा की एसडीएम तथा एसडीओपी को भी हटाया जा चुका है।
CM मोहन यादव खुद संभाल सकते हैं मोर्चा
जहरीली शराब कांड को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार अधिकारियों से अपडेट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री के प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने की संभावना के बीच प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। सरकार ने साफ किया है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ा
बंडा क्षेत्र के नौरोजा, घूघरा खुर्द और आसपास के गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी थी। शुरुआत में 10 मौतों की पुष्टि हुई थी। इसके बाद आंकड़ा लगातार बढ़ा। 8 सितंबर की रिपोर्टों में 15 मौतों की पुष्टि बताई गई थी, जबकि 9 सितंबर को कुछ रिपोर्टों में तीन और मौतों के बाद आंकड़ा बढ़ने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, राज्य के एक मंत्री ने 19 मौतों का आंकड़ा बताया, जबकि जिला प्रशासन का आंकड़ा अलग रहा। ऐसे में अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार है।
30 आरोपियों पर FIR, 14 गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने 30 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है और अब तक 14 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस अवैध शराब की सप्लाई, निर्माण और वितरण से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से संभावित कनेक्शन की बात भी सामने आई है, हालांकि इस दावे को लेकर दोनों राज्यों की पुलिस के बीच अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
पहले ही कई अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया था और एक अधिकारी को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच किया गया। इसके बाद बंडा एसडीओपी और एसडीएम पर भी कार्रवाई हुई। साथ ही मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसमें घटना के कारण, शराब की सप्लाई चेन और संभावित प्रशासनिक लापरवाही की जांच होगी।
शराब के नमूने और गांवों में स्क्रीनिंग
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्क्रीनिंग शुरू कराई है। संदिग्ध शराब के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मेथनॉल सेवन की आशंका सामने आने की बात कही गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीली शराब कहां तैयार हुई और इसे किन लोगों ने गांवों तक पहुंचाया।
सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदारी तय होगी?
सागर की घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के नेटवर्क और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर मुख्यमंत्री की संभावित सागर यात्रा और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। क्या जिम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी या बड़े प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी? इस पर फैसला सरकार की जांच और समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगा।
