Anmol Sandesh News Desk,भोपाल।
राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों और सरकार के बीच आखिरकार बातचीत के बाद सहमति बनने के संकेत मिले हैं। बुधवार को हुई बैठक में ₹21,500 मासिक स्टाइपेंड के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने की बात सामने आई है। इसके बाद माना जा रहा है कि पिछले तीन दिनों से चल रहा इंटर्न डॉक्टरों का धरना जल्द खत्म हो सकता है। इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बातचीत हुई। बैठक में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, ABVP और टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इससे पहले सरकार ने मौजूदा ₹14,337 स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹18,500 करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन डॉक्टरों ने इसे स्वीकार नहीं किया था। डॉक्टर अपनी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए थे।
तीन दिन से धरने पर बैठे थे डॉक्टर
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टर पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। मंगलवार को भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से मिलने पहुंचे और उनकी मांगों पर बातचीत की। इसके बाद डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच आगे की वार्ता का रास्ता खुला। बुधवार को हुई बातचीत में स्टाइपेंड को लेकर नया प्रस्ताव सामने आने के बाद गतिरोध खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, हड़ताल औपचारिक रूप से समाप्त होने की घोषणा संबंधित डॉक्टर संगठन की ओर से किए जाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
लाठीचार्ज के बाद दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच
डॉक्टरों के आंदोलन के दौरान सोमवार रात पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद डॉक्टरों ने संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। मामले में अब दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, लाठीचार्ज की जांच गृह सचिव द्वारा किए जाने की बात कही गई है। स्टाइपेंड के साथ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी डॉक्टरों के आंदोलन में प्रमुख मांग बन गया था।

पहले बातचीत में नहीं बनी थी बात
एक दिन पहले देर रात कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गांधी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। उस दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन तत्काल कोई सहमति नहीं बन पाई थी। कलेक्टर ने डॉक्टरों से बातचीत को सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझती है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में असर
स्टाइपेंड और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर आंदोलन का असर भोपाल के अलावा प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी देखने को मिला। जबलपुर और इंदौर में भी MBBS इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर प्रदर्शन किया। जबलपुर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर डीन कार्यालय के सामने एकत्र हुए और अपनी मांगें रखीं। वहीं इंदौर के सरकारी अस्पताल में भी डॉक्टरों के प्रदर्शन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। OPD समेत कुछ सेवाओं पर आंदोलन का प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई।
अब नजर हड़ताल खत्म होने के औपचारिक ऐलान पर
₹21,500 स्टाइपेंड पर सहमति बनने की खबर के बाद डॉक्टरों के आंदोलन को लेकर तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या डॉक्टर सरकार के नए प्रस्ताव को स्वीकार कर काम पर लौटेंगे? यदि संगठन की ओर से औपचारिक रूप से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा होती है, तो प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है।
