Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठ रही शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से कई छात्र निराश हैं और बोर्ड से पूछा कि अब तक इस व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत का उद्देश्य सरकार से टकराव नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।

CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा,“देखिए, छोटे-छोटे बच्चों में कितनी निराशा है।”उन्होंने कहा कि यदि मूल्यांकन प्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उसमें सुधार की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
क्या है CBSE का OSM सिस्टम?
OSM (On-Screen Marking) ऐसी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें:
- उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) को स्कैन किया जाता है।
- परीक्षक कागज़ की कॉपी की बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं।
- इसका उद्देश्य मूल्यांकन को तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाना है।
हालांकि, कुछ छात्रों ने इस प्रणाली में मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों और अंकन को लेकर शिकायतें उठाई हैं।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि:
- जिन छात्रों की मार्कशीट में गड़बड़ियां थीं, उनमें से अधिकांश मामलों का समाधान कर दिया गया है।
- सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
- मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया गया है।
- आयोग OSM प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगा।
सरकार ने कहा कि इस मामले को टकराव के रूप में नहीं, बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मटादन शुक्ला के माध्यम से दायर की है।याचिका में मांग की गई है कि:
* OSM मूल्यांकन प्रणाली के लिए स्पष्ट नियमावली बनाई जाए।
* निगरानी और सुधार लागू करने के लिए हाई-पावर कमेटी गठित की जाए।
* जिन छात्रों को प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उन्हें न्यूनतम अंकों की शर्त में राहत दी जाए।
* विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए 12वीं के 75% या अन्य न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता में भी उचित छूट देने पर विचार किया जाए।
छात्रों की चिंता पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर
कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन व्यवस्था बेहद जरूरी है।अब CBSE को अदालत के सामने यह बताना होगा कि:
- OSM प्रणाली में क्या सुधार किए गए हैं?
- भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE और केंद्र सरकार से मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है। आने वाली सुनवाई में इस मामले पर आगे की दिशा तय हो सकती है।
