Anmol Sandesh News Desk,वॉशिंगटन/तेहरान/जिनेवा
करीब चार महीने से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है। वहीं ईरानी अधिकारियों ने भी समझौते की पुष्टि की है। हालांकि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हैं।इस समझौते के बाद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
ट्रंप ने हटाई नौसैनिक नाकेबंदी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।उन्होंने लिखा, “दुनिया के जहाज अपना इंजन चालू करें और तेल की सप्लाई फिर से शुरू करें।”होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। उन्होंने बताया कि कतर, सऊदी अरब और तुर्किये ने मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की योजना है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि समझौते की शर्तें हस्ताक्षर के बाद ही प्रभावी होंगी।
समझौते के प्रमुख बिंदु
सूत्रों और ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार समझौते में कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक बिंदु शामिल हैं-
- ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत।
- ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक व्यापक पहुंच।
- फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने का प्रस्ताव।
- ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए बड़े निवेश पैकेज पर चर्चा।
- लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां रोकने की प्रतिबद्धता।
- होर्मुज क्षेत्र में नौसैनिक तनाव कम करने की योजना।
- अगले 60 दिनों में व्यापक वार्ता के जरिए शेष मुद्दों को सुलझाने का प्रयास।
- दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का सिद्धांत।
अभी भी बाकी हैं कई अहम सवाल
हालांकि समझौते को बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों की अंतिम स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रहेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि 19 जून को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर और उसके बाद की वार्ताएं इस समझौते की वास्तविक दिशा तय करेंगी।
