Friday, May 29, 2026
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जून-जुलाई में भी पड़ेगी भीषण गर्मी, कमजोर रहेगा मानसून,श्रीलंका में अटका, 7 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून, IMD ने घटाया बारिश का अनुमान, इस बार 78 सेमी बारिश संभव, यह सामान्य से 10% कम

नई दिल्ली (अनमोल संदेश डिजिटल).:

देश में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) ने अपने पहले अनुमान में बदलाव करते हुए कहा है कि 2026 के मानसून सीजन में देश में औसतन करीब 78 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है, जो सामान्य से लगभग 10% कम है।इससे पहले 13 अप्रैल को IMD ने 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान जताया था। 1971-2020 के आंकड़ों के अनुसार भारत में औसत मानसूनी बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के करीब 90% रहने की संभावना है।

श्रीलंका में अटका मानसून, केरल पहुंचने में और देरी:

मानसून फिलहाल श्रीलंका के आसपास रुका हुआ है और केरल तट से करीब 30-35 किलोमीटर दूर अटका हुआ है। IMD के अनुसार अगले 7 दिनों में मानसून केरल पहुंच सकता है।मौसम विभाग ने 15 मई को अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन यह पूर्वानुमान गलत साबित हुआ। अब IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा के मुताबिक मानसून 7 जून तक केरल में दस्तक दे सकता है।पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को केरल पहुंच गया था।

जून-जुलाई में भी चलेगी हीटवेव:

IMD ने चेतावनी दी है कि जून और जुलाई में भी कई राज्यों में हीटवेव जारी रह सकती है।उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से 2 से 3 डिग्री ज्यादा तापमान रहने की संभावना है। आमतौर पर इस दौरान तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस रहता है, लेकिन इस बार पारा और ऊपर जा सकता है।

एमपी, यूपी और बिहार में कम बारिश के संकेत:

मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।वहीं राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश हो सकती है।

खेती पर पड़ेगा सीधा असर:

IMD ने बताया कि इस बार मानसून कोर जोन में कम बारिश हो सकती है। यह वही इलाका है जहां खेती सबसे ज्यादा मानसून पर निर्भर करती है।

इन क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • विदर्भ (महाराष्ट्र)
  • झारखंड
  • ओडिशा
  • तेलंगाना
  • उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्से
  • कम बारिश का असर खरीफ फसलों, किसानों की आय और खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है।

अल-नीनो बना कमजोर मानसून की बड़ी वजह:

मौसम विभाग के मुताबिक इस साल कमजोर मानसून की मुख्य वजह अल-नीनो प्रभाव है। जून से अगस्त के बीच कमजोर से मध्यम स्तर का अल-नीनो एक्टिव रह सकता है।अल-नीनो के दौरान समुद्र का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे हवाओं का पैटर्न बदलता है और मानसूनी बारिश प्रभावित होती है। इसके कारण कहीं सूखा और कहीं अत्यधिक बारिश जैसी स्थिति बनती है।सरल शब्दों में कहें तो अल-नीनो भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम होती है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

  • खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
  • सब्जियों, दालों और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।
  • गांवों में आय घटने से ग्रामीण बाजार कमजोर पड़ सकता है।
  • ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसी ग्रामीण बिक्री प्रभावित हो सकती है।
  • डैम और जलाशयों में पानी कम भरने का खतरा बढ़ेगा।
  • ज्यादा गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ सकती है।

भारत में मानसून का सामान्य सफर:

  • केरल में सामान्य एंट्री: 1 जून
  • मुंबई पहुंचने का समय: करीब 11 जून
  • पूरे देश में फैलाव: 8 जुलाई तक
  • वापसी की शुरुआत: 17 सितंबर
  • पूरी वापसी: 15 अक्टूबर तक

IMD के आंकड़ों के अनुसार पिछले 150 वर्षों में मानसून सबसे जल्दी 11 मई 1918 को और सबसे देर से 18 जून 1972 को केरल पहुंचा था।

 

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