Anmol Sandesh News Desk,इंदौर
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इंदौर जिले के देपालपुर स्थित गीता विहार कॉलोनी में कथित प्लॉट धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। EOW ने एसएमसी इन्फ्रा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, आम मुख्त्यारधारी और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।आरोप है कि कॉलोनी के विकास के लिए बंधक रखे गए प्लॉटों को नियमों के विरुद्ध बेच दिया गया, जिससे खरीदारों को करीब 55.80 लाख रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।

बंधक रखे गए प्लॉट बेचने का आरोप
जांच के अनुसार ग्राम ताजखेड़ी स्थित गीता विहार कॉलोनी के प्लॉट नंबर 88, 89, 90 और 124 को कॉलोनी विकास कार्यों की शर्तों के तहत बंधक रखा गया था।लेकिन आरोप है कि मार्च और मई 2018 के बीच इन प्लॉटों को करीब 55.80 लाख रुपये में बेच दिया गया, जबकि उस समय विक्रेताओं के पास इन संपत्तियों का स्वामित्व हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं था।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का भी आरोप
यह मामला भ्रष्टाचार विरोधी संगठन के सचिव एस. शिवम की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कॉलोनी का विकास कार्य पूरा होने से पहले ही फर्जी इंजीनियरिंग प्रमाण-पत्र तैयार कर उसे RERA में पेश किया गया।इसके अलावा शासन के पास बंधक रखे गए प्लॉटों की बिक्री किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
कॉलोनी का विकास कार्य अधूरा मिला
EOW की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कॉलोनी में करीब 70 प्रतिशत विकास कार्य ही पूरा हुआ था।
जांच में:
- बाउंड्रीवाल
- सड़क निर्माण
- ड्रेनेज लाइन
- वाटर लाइन
- पानी की टंकी
- सेप्टिक टैंक
- मुख्य द्वार
- उद्यान
जैसे कई काम किए गए थे, लेकिन बिजली से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण कार्य अधूरे पाए गए।
आम मुख्त्यारनामा के बाद बिक्री का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के डायरेक्टर सुरेश ठाकुर ने 22 दिसंबर 2017 को 35 प्लॉटों का आम मुख्त्यारनामा दिनेश मुकाती के नाम किया था।इसके बाद इन्हीं प्लॉटों में शामिल कुछ बंधक संपत्तियों की बिक्री किए जाने का आरोप है।
EOW ने दर्ज किया मामला
संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी अधिकारी, कॉलोनी सेल से मिली जानकारी के आधार पर EOW ने माना कि संबंधित प्लॉट अब तक बंधनमुक्त नहीं किए गए थे, फिर भी उनकी रजिस्ट्री कर दी गई।इसी आधार पर EOW ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी मानते हुए आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420 और 34 के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब आगे क्या?
EOW मामले से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और कॉलोनी विकास से संबंधित प्रमाणों की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।
